



जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर:- मौसम तल्ख होते ही वन क्षेत्रों में संभावित अगलगी की घटनाओं के मद्देनजर वन विभाग ने अब ठोस और प्रभावी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। आग की घटनाओं से त्वरित और व्यवस्थित ढंग से निपटने के लिए वनकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस संबंध में वाल्मीकिनगर के रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि विभागीय स्तर पर सतर्कता बढ़ा दी गई है और कर्मचारियों को आग बुझाने की आधुनिक तकनीकों, त्वरित बचाव कार्य तथा निगरानी प्रणाली के बारे में प्रशिक्षित किया जा रहा है।
रेंजर सत्यम कुमार ने जानकारी देते हुए कहा कि जंगलों में आग लगने की घटनाएं अक्सर मानवीय लापरवाही के कारण होती हैं। ऐसे में विभाग केवल आग बुझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आग की रोकथाम पर भी विशेष जोर दे रहा है। वनकर्मियों को मॉक ड्रिल के माध्यम से यह सिखाया जा रहा है कि आग लगने की स्थिति में किस प्रकार कम समय में मौके पर पहुंचकर उसे नियंत्रित किया जाए और वन्य जीवों व वन संपदा को सुरक्षित रखा जाए। उन्होंने बताया कि आग पर नियंत्रण के लिए आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की आग की घटना की सूचना तुरंत मिल सके। विभाग द्वारा गश्ती दलों की संख्या भी बढ़ाई गई है, जिससे जंगल के अंदर और आसपास के क्षेत्रों पर कड़ी नजर रखी जा सके। वन विभाग ने इस मुहिम में ग्रामीणों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया है। रेंजर ने ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि खेतों में फसल अवशेष जलाते समय पूरी सावधानी बरतें। तेज हवा या सूखे मौसम में आग लगाने से बचें, क्योंकि छोटी सी चिंगारी भी बड़े जंगल की आग का रूप ले सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि जंगल या उसके आसपास सिगरेट, बीड़ी, माचिस जैसी ज्वलनशील वस्तुएं न फेंकें। ग्रामीणों से यह भी आग्रह किया गया है कि यदि कहीं आग या धुआं दिखाई दे तो इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि समय पर सूचना मिलना आग पर नियंत्रण के लिए सबसे अहम होता है। वन विभाग का मानना है कि सामूहिक जागरूकता और प्रशिक्षण के जरिए ही जंगलों को सुरक्षित रखा जा सकता है। विभागीय सतर्कता के साथ-साथ आमजन की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि सभी लोग मिलकर सावधानी बरतें तो वन क्षेत्र को आग की घटनाओं से काफी हद तक बचाया जा सकता है। जंगल केवल प्राकृतिक संपदा ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संतुलन और वन्य जीवों का आश्रय स्थल भी हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा हर नागरिक का दायित्व है। वन विभाग द्वारा शुरू की गई यह पहल निश्चित रूप से आगजनी की घटनाओं को कम करने में सहायक साबित होगा।










