

टीम बिल्डिंग, नेपाल समन्वय और हाईटेक निगरानी के सहारे बाढ़ से मुकाबले की व्यापक तैयारी
जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर: बिहार में एक जून से आधिकारिक रूप से बाढ़ सीजन शुरू होने जा रहा है। मानसून की संभावित समय पूर्व दस्तक को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने गंडक बराज समेत सभी संवेदनशील क्षेत्रों में व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। इस बार विभाग केवल पारंपरिक उपायों पर निर्भर नहीं है, बल्कि आधुनिक तकनीक, बेहतर समन्वय और त्वरित आपदा प्रबंधन व्यवस्था को भी प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि संभावित बाढ़ और कटाव से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। विभागीय अधिकारियों के अनुसार राज्य में एक जून से 15 अक्टूबर तक की अवधि को आधिकारिक बाढ़ सीजन माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए गंडक बराज, तटबंधों और कटाव प्रभावित इलाकों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। विभागीय नियंत्रण कक्ष को 24 घंटे सक्रिय रखने की व्यवस्था की गई है, जहां अभियंता और तकनीकी कर्मी लगातार जलस्तर और तटबंधों की निगरानी करेंगे। संवेदनशील स्थानों पर अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति कर नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी । इस बार बाढ़ प्रबंधन में “टीम बिल्डिंग” की नई कार्यशैली को विशेष महत्व दिया जा रहा है। इसके तहत अभियंताओं, प्रशासनिक अधिकारियों, स्थानीय कर्मियों और अन्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित निर्णय लेकर राहत एवं बचाव कार्य प्रभावी ढंग से संचालित किए जा सकें। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि मानवीय तालमेल और तेज सूचना प्रणाली बाढ़ नियंत्रण में निर्णायक भूमिका निभाएगी। तटबंधों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए“बाढ़ संघर्षात्मक बल” भी सक्रिय रहेगा। अनुभवी सेवानिवृत्त अभियंताओं की अध्यक्षता में गठित यह टीम क्षेत्रीय अभियंताओं को तकनीकी सलाह देने के साथ आपात परिस्थितियों में तत्काल मार्गदर्शन प्रदान करेगी। इसके अलावा कटाव प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा कार्यों को और मजबूत करने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की व्यवस्था की जा रही है। इधर गंडक बराज से निकलने वाली मुख्य पश्चिमी नहर और मुख्य तिरहुत नहर में सिंचाई के लिए पानी छोड़े जाने की तैयारी भी जारी है। फिलहाल मेंटेनेंस कार्य के कारण बराज से जलस्त्राव शून्य रखा गया है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि डिवीजन-एक बेतिया और सिंचाई खंड गोरखपुर की मांग के अनुसार नहरों में जलापूर्ति की जाती है। वहीं नेपाल स्थित 15 मेगावाट क्षमता वाले सूरजपुरा हाइड्रो इलेक्ट्रिकल पावर स्टेशन के संचालन के लिए भी गंडक बराज से पानी उपलब्ध कराया जाता है। करीब साढ़े आठ लाख क्यूसेक क्षमता वाला गंडक बराज वर्ष 2003 में 6 लाख 39 हजार 800 क्यूसेक पानी का दबाव झेल चुका है। बराज संचालन के लिए स्काडा सिस्टम, इलेक्ट्रिकल पैनल और मैनुअल तीनों व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। सुरक्षा के दृष्टिकोण से बराज परिसर में 56 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं तथा मौसमी मजदूरों की तैनाती भी की गई है। इस संदर्भ में अधीक्षण अभियंता मोहम्मद जिलानी ने बताया कि बाढ़ अवधि के दौरान नेपाल के अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय और सूचनाओं के आदान-प्रदान पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा मानसून के समय से पहले पहुंचने की संभावना जताए जाने के बाद पूरा तंत्र पहले से अधिक सतर्क और सक्रिय नजर आ रहा है।










