वट वृक्ष के फेरे संग अखंड सौभाग्य की कामना, वाल्मीकिनगर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया वट सावित्री व्रत।

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सुहागिनों ने पति की लंबी आयु के लिए रखा निर्जला उपवास

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- थाना क्षेत्र में शनिवार को वट सावित्री व्रत श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए विधि-विधान से वट वृक्ष की पूजा-अर्चना की। सुबह होते ही क्षेत्र के विभिन्न गांवों और मोहल्लों में महिलाओं की टोलियां सोलह श्रृंगार कर पूजा स्थल की ओर रवाना हुईं। वट वृक्ष के नीचे सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया, जहां धार्मिक वातावरण भक्तिमय बना रहा। पूजा के दौरान महिलाओं ने जल से भरा कलश, रोली, कुमकुम, सिंदूर, हल्दी, अक्षत, कच्चा सूत, धूप, अगरबत्ती, कपूर, दीपक, चुनरी और पंचामृत सहित विभिन्न पूजन सामग्रियों से वट वृक्ष की आराधना की। नवविवाहित महिलाओं में इस पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। पारंपरिक परिधानों और आभूषणों से सजी महिलाओं ने वट वृक्ष की सात बार परिक्रमा कर रक्षा सूत्र बांधा और पति की लंबी उम्र तथा सात जन्मों तक अटूट वैवाहिक संबंध की कामना की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट सावित्री व्रत माता सावित्री और सत्यवान की अमर कथा से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि माता सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प, तप और भक्ति के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत प्रेम, समर्पण और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर पंडित अनिरुद्ध द्विवेदी ने बताया कि हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है, इसलिए इसे अक्षय वट भी कहा जाता है। इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ व्रत एवं पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और पति की दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पूरे दिन क्षेत्र में धार्मिक उल्लास और भक्ति का माहौल बना रहा।

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