शिव भक्तों के जयघोष से गूंज उठा वाल्मीकि धाम।

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पंचकोसी परिक्रमा में उमड़ा आस्था का जन सैलाब

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- महर्षि बाल्मीकि की तपोभूमि वाल्मीकिनगर महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर पूरी तरह शिवमय हो उठा। “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष से संपूर्ण क्षेत्र गूंजायमान रहा। देवाधिदेव महादेव की आराधना के लिए स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ सीमावर्ती नेपाल और उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में सनातनी भक्त पहुंचे। आस्था का प्रमुख केंद्र जटाशंकर धाम रहा, जहां सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। नगर के कालेश्वर शिव मंदिर, चंदेश्वर नाथ महा शिव मंदिर तथा नीलकंठ महादेव शिव मंदिर सहित अन्य शिवालयों में हजारों श्रद्धालुओं ने पुष्प, बेलपत्र और गंगाजल अर्पित कर भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। मंदिरों को आकर्षक फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया था, जिसका दृश्य देखते ही बन रहा था। दिन चढ़ने के साथ भक्तों की भीड़ और बढ़ती गई।
परंपरा के अनुसार इस अवसर पर शिव-पार्वती विवाह की सांकेतिक झांकी निकाली गई। भूत-प्रेत की वेशभूषा में सजे श्रद्धालुओं ने बारात में शामिल होकर उत्सव को जीवंत बना दिया। जानकारों के अनुसार इस वर्ष दुर्लभ संयोग बनने के कारण महाशिवरात्रि का महत्व और भी विशेष रहा।

पंचकोसी परिक्रमा में उमड़ा श्रद्धा का जनसैलाब

महाशिवरात्रि के अवसर पर त्रिवेणी संगम क्षेत्र में पंचकोसी परिक्रमा का भव्य आयोजन किया गया। परिक्रमा का शुभारंभ नेपाल स्थित भक्तेश्वर महादेव मंदिर से हुआ। इसके बाद श्रद्धालु बालेश्वर महादेव शिव मंदिर होते हुए नारायणी संगम पार कर वाल्मीकि आश्रम के बाद जटाशंकर धाम पहुंचे।
यात्रा आगे बढ़ते हुए महाकालेश्वर मंदिर, माता नरदेवी मंदिर और तीन आरडी पुल स्थित चंदेश्वर महा शिव मंदिर तक पहुंची। समाजसेवी सुरेश गुप्ता के आवास परिसर में श्रद्धालुओं का भव्य स्वागत किया गया तथा जलपान की व्यवस्था की गई। अंतिम चरण में श्रद्धालु लवकुश घाट स्थित राधा-कृष्ण मंदिर की परिक्रमा करते हुए गंडक बराज मार्ग से रानीनगर (नेपाल) के दुर्गा मंदिर, शिव मंदिर और केवलानी माता मंदिर पहुंचे। गजेन्द्र मोक्ष दिव्य धाम होते हुए पुनः भक्तेश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर परिक्रमा को विराम दिया गया।

“पंचकोसी परिक्रमा से मिलता है सभी तीर्थों का फल”

नागा कुटी त्रिवेणी धाम (नेपाल) के महंत बाबा बालक दास महाराज ने बताया कि पंचकोसी परिक्रमा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। पौराणिक मान्यता है कि पांच कोस की यह परिक्रमा करने से नारायणी सहित सभी देवताओं, ऋषियों और सिद्धों के दर्शन का पुण्य फल प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि मानव शरीर पंचतत्वों से बना है और पंचकोसी परिक्रमा इन तत्वों के संतुलन का प्रतीक है, जिससे कष्टों का निवारण और जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं की सहभागिता ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। उल्लास और आस्था के इस अद्भुत संगम ने वाल्मीकि धाम को शिवमय बना दिया।

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