



बेतिया जिला ब्यूरो विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर:-आपातकाल स्थिति में बचाव व सुरक्षा के दृष्टिकोण से संपर्क क्यूआर स्टीकर एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा। इस बाबत वाल्मीकि नगर स्थित स्वरांजलि सेवा संस्थान के कार्यालय में संपर्क स्कैनर के कस्टमर सपोर्ट अधिकारी ने संपर्क क्यूआर स्टीकर के बारे में प्रेस वार्ता में जानकारी देते हुए कस्टमर सपोर्ट अधिकारी अमित वर्मा एवं प्रिंस कुमार ने बताया कि संपर्क क्यूआर स्टिकर एक स्मार्ट सेफ्टी क्यूआर कोड है जिसे वाहनों पर लगाया जाता है, ताकि आपातकालीन स्थिति में त्वरित सहायता मिल सके। यह स्टिकर एक डिजिटल सुरक्षा कवच के रूप में काम करता है। वाहन पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करके वाहन मालिक के परिवार के सदस्यों को तुरंत सूचित किया जा सकता है। यह क्यूआर कोड लोगों को सीधे संपर्क करने की सुविधा देता है, जिससे निजी फोन नंबर साझा करने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। क्यूआर कोड स्कैन कर घरवालों तक सूचना प्रदान करने का लाइव डेमो भी दिया। उन्होंने बताया कि भारत में हर साल करीब 1.5 लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा देते हैं। इसका मुख्य कारण है गोल्डन आवर में इलाज न मिल पाना। मरीज की कई बार स्थित इतनी नाजुक होती है कि वह घटना की सूचना अपने परिजनों को दे पाने की स्थिति में नहीं रहता है। और घायल व्यक्ति का मोबाइल लॉक रहता है। इस वजह से भी इलाज में देरी होती है।दरअसल गोल्डन आवर सड़क दुर्घटना के तुरंत बाद के पहले 60 मिनट को कहा जाता है। यदि इस अवधि में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचा दिया जाए या उसे प्राथमिक चिकित्सा दे दी जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इतना ही नहीं, इस समय पर सही देखभाल से चोट की गंभीरता को भी कम किया जा सकता है। एक्सीडेंट में घायल व्यक्ति को समय से मदद ना मिले तो अपनी जान से हाथ धो बैठता है। लेकिन, अब इस समस्या का समाधान यह क्यूआर कोड है।

ऐसे काम करता है क्यूआर स्कैनर कोड
यह कार स्कैनर कोड यूजर्स के परिजनों का मोबाइल नंबर एक जगह स्टोर करता है। इसके बाद हर यूजर का एक यूनिक QR कोड तैयार किया जाता है। इस कोड को गाड़ी के ऊपर स्टीकर की तरह चिपकाया जाता है। यदि परिजनों को दुर्घटना होने के तुरंत बाद सूचित कर दिया जाए और वे समय पर पहुंच जाएं, तो घायल की जान बच सकती है। बाइक/कार सुरक्षा क्यूआर को स्कैन कर घायल व्यक्ति के परिवार वालों को कॉल किया जा सकता है। जिससे घायल व्यक्ति के परिजन भी समय पर चिकित्सा/अन्य सहायता उपलब्ध करा सकते हैं।इस स्कैनर की मदद से उत्तर बिहार में लगभग अब तक 17 लोगों की जान बचाई जा चुकी है। आजकल अक्सर ऐसी घटनाएं घटती है कि वाहन दुर्घटना होने के बाद कोई नंबर उपलब्ध नहीं हो पाता है जिससे घायल व्यक्ति की सूचना उनके परिजनों को दी जा सके। दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के पास जो मोबाइल होता है वह भी लॉक होता है । जिसका पासवर्ड मोबाइल उपभोक्ता को ही पता होता है। ऐसी स्थिति में आपातकाल में व्यक्ति के परिजनों को सूचना नहीं मिल पाती है। देरी की वजह से कई लोगों की असमय मौत भी हो जाती है। वाल्मीकि नगर वासी समाजसेवी संगीत आनंद एवं अखिलानंद ने इस स्कैनर को सामान्य शुल्क देकर खरीदा और कहा कि इस संपर्क स्कैनर से सचमुच किसी की जान बचाई जा सकती है।










