



वन विभाग द्वारा अनुपयोगी खरपतवार को हटाने की प्रक्रिया शुरू, बहुत जल्द वन प्रमंडल दो में भी शुरू होगा कम
जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर:- वीटीआर में लैंटाना सहित अन्य अनुपयोगी घास अब मुसीबत बनती जा रही है। इसके उन्मूलन को लेकर वन विभाग सतत प्रयत्नशील है। ग्रासलैंड से लैंटाना, विलायती बबूल, माईकेनिया,गाजर घास, सहित अन्य अनुपयोगी घासों को हटाने के निर्देश दिए हैं। वीटीआर में अनुपयोगी घास बेहद तेजी से फैल रहा है। इसके फैलने से अन्य पौधे अपना अस्तित्व खो रहे हैं। इतना ही नहीं लैंटाना सहित विलायती बबूल , गाजर घास आदि से उपजाऊ भूमि भी बंजर होती जा रही है। जो चिंता का विषय है। वैसे तो वन विभाग कई सालों से अनुपयोगी घास उन्मूलन को लेकर पहल करती आ रही है।अब वन विभाग ने एक बार फिर से अनुपयोगी घास को हटाने की कवायद युद्ध स्तर पर डिवीजन वन से शुरू की है। ऐसा नहीं है कि पहली बार इसे हटाने की पहल की जा रही है। इससे पहले भी कई बार इस ओर कदम उठाया गया है। सीएफ नेशामणि की मानें तो वीटीआर के वनक्षेत्रों में जंगल के अंदर बाघों को भोजन के लिए शाकाहारी जानवरों की तादाद बढ़ाने के लिए ग्रासलैंड एक अहम कड़ी साबित होगी। जंगल के अंदर ग्रासलैंड आवश्यकता के अनुसार होंगे तो चीतल, हिरण, सांभर, नीलगाय जैसे शाकाहारी जानवर जंगल के अंदर ही अधिवास बनाएंगे, जिससे बाघों को भोजन जंगल के अंदर ही मिलता रहेगा। लैंटाना घास को विदेशी प्रजाति माना जाता है। वीटीआर में इसके लिए अनुकूल वातावरण होने के साथ यह बड़ी तेजी से उगती है। वहीं इसका बढ़ना पारिस्थितिक तंत्र के लिए खतरनाक माना जाता है। क्योंकि जमीन की उर्वरा क्षमता को खत्म करने के साथ झाड़ीनूमा प्रजाति की यह घास बतौर चारे के तौर पर इस्तेमाल करने पर पशुओं के लिए भी घातक सिद्ध होता है। वहीं जैव विविधता के लिए खतरा पैदा करने वाली यह घासें जंगल की आग भड़काने का काम करती है। इसकी पत्तियों में तरल होता है। जो बड़ी तेजी से आग को फैलाती हैं। लैंटाना अपने आसपास अन्य कोई चारा प्रजाति को पनपने नहीं देती। लिहाजा ग्रासलैंड के लिए इसे विनाशकारी माना जाता है। वीटीआर के कई एरिया को चिन्हित किया गया है। फिलहाल डिवीजन वन में यह कार्य प्रगति पर है। आने वाले दिनों में डिवीजन टू में भी घास उन्मूलन किया जाएगा।
वीटीआर का केंद्र बिंदु ग्रासलैंड
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व प्रशासन का मुख्य फोकस ग्रासलैंड होता है। अगर ग्रासलैंड का क्षेत्र अधिक होगा तो शाकाहारी वन्य जीवों की संख्या में वृद्धि होगी। मांसाहारी वन्यजीव शाकाहारी जानवरों पर निर्भर होते हैं। अगर उन्हें जंगल के अंदर ही भोजन मिल जाएगा, तो वे रिहायशी क्षेत्र के तरफ रूख करना बंद कर देंगे। इसीलिए वन विभाग अनुपयोगी घासों को हटा, ग्रासलैंड क्षेत्र को बढ़ाने में जुटा हुआ है।










