भोजपुरी को संवैधानिक मान्यता दिलाने की हुंकार, आठवीं अनुसूची में शामिल करने को लेकर तेज होगा आंदोलन, राष्ट्रीय हस्ताक्षर महाअभियान की शुरुआत।

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वाल्मीकिनगर में राष्ट्रीय भोजपुरी संस्थान की समीक्षात्मक बैठक में जुटे साहित्यकार, कलाकार और सामाजिक कार्यकर्ता

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग अब और तेज होने जा रही है। इसी उद्देश्य को लेकर वाल्मीकिनगर स्थित कौशल विकास केंद्र में राष्ट्रीय भोजपुरी संस्थान की कार्यकारिणी समिति की समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में बिहार के विभिन्न जिलों से पहुंचे भोजपुरी भाषा के समर्थकों, साहित्यकारों, कवियों, गीतकारों, संगीतकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया तथा भोजपुरी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए व्यापक आंदोलन चलाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में विकास नगर चांदमारी छपरा स्थित मुख्य कार्यालय से आए संस्थान के कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक में मुख्य रूप से बृजमोहन अनारी, कोषाध्यक्ष अनिल कुमार गुप्ता, राष्ट्रीय संगठन सचिव जैनेंद्र कुमार शुक्ला, महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनम मिश्रा, राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंह समेत करीब 40 सदस्य शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा कि भोजपुरी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि समृद्ध साहित्य, लोकसंस्कृति, परंपरा और करोड़ों लोगों की पहचान है। बैठक को संबोधित करते हुए बृजमोहन अनारी ने कहा कि जब तक भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया जाता, तब तक संगठन का आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि भोजपुरी भाषी समाज वर्षों से अपनी मातृभाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने की मांग कर रहा है, लेकिन अब तक इसे अपेक्षित सम्मान नहीं मिल सका है। राष्ट्रीय संगठन मंत्री जय हिंद साहु ने कहा कि भोजपुरी भाषा आज भी उपेक्षा का शिकार है, जबकि इसकी अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और साहित्यिक परंपरा है। उन्होंने कहा कि बंगाली और मैथिली जैसी भाषाओं को राजकीय मान्यता मिल चुकी है, ऐसे में भोजपुरी भाषियों की पहचान और अधिकारों को भी सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब इस मुद्दे को जन आंदोलन का रूप दिया जाएगा। बैठक में राष्ट्रीय हस्ताक्षर महाअभियान की औपचारिक शुरुआत भी की गई। इसके तहत विद्यार्थियों, शिक्षकों, सरकारी कर्मियों, पत्रकारों, अधिवक्ताओं, कलाकारों, बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों से समर्थन जुटाया जाएगा। अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए प्रमंडल, जिला और प्रखंड स्तर पर प्रभारी नियुक्त करने की रणनीति तैयार की गई। कार्यक्रम के अंत में सभी सदस्यों ने एकजुट होकर भोजपुरी भाषा को राष्ट्रीय पहचान दिलाने तथा नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा और संस्कृति से जोड़ने के लिए निरंतर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।

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