

जटाशंकर और कौलेश्वर महादेव मंदिर में गूंजा हर-हर महादेव, यूपी-बिहार से पहुंचे हजारों श्रद्धालु।
जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर : वाल्मीकि टाइगर रिजर्व क्षेत्र स्थित त्रिवेणी संगम तट पर मंगलवार को गंगा दशहरा के अवसर पर श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि पर आयोजित पावन स्नान के अंतिम चरण में बिहार और उत्तर प्रदेश से हजारों श्रद्धालु वाल्मीकिनगर पहुंचे और नारायणी संगम में आस्था की डुबकी लगाई। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने दान-पुण्य कर जटाशंकर महादेव मंदिर और कौलेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक किया। पूरे दिन मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” और “गंगा मैया की जय” के जयघोष से भक्तिमय बना रहा। महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि के रूप में प्रसिद्ध वाल्मीकिनगर के सघन जंगलों में स्थित ये पौराणिक मंदिर सनातन आस्था के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां स्नान और भगवान शिव का जलाभिषेक करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
गंगा स्नान को लेकर प्रशासन की ओर से नारायणी नदी के कालीघाट, बेलवा घाट और कौलेश्वर संगम घाट को सुरक्षित स्नान स्थल के रूप में चिन्हित किया गया था। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और गंडक नदी में बढ़े जलस्तर को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। सशस्त्र सीमा बल के गोताखोर और जवान कालीघाट से लेकर त्रिवेणी संगम घाट तक लगातार निगरानी में जुटे रहे।

जवान एक-एक गतिविधि पर नजर बनाए हुए थे, ताकि स्नान के दौरान किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। गंगा दशहरा के अवसर पर दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। कुशीनगर से आए आचार्य अभिमुक्ति शर्मा ने बताया कि गंगा दशहरा का यह स्नान अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। उन्होंने कहा कि इस दिन गंगा स्नान और भगवान शिव का जलाभिषेक करने से मनुष्य के दस प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है तथा पितरों की आत्मा को शांति प्राप्त होती है। उन्होंने वाल्मीकिनगर की धार्मिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वही पावन भूमि है जहां माता सीता, लव-कुश और महर्षि वाल्मीकि का निवास रहा था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता सीता भी नारायणी नदी में स्नान करती थीं। यही कारण है कि यह क्षेत्र धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।










