

गंगा दशहरा पर नारायणी संगम तट पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, स्नान-दान और भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ कौलेश्वर घाट।
जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर:- ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर मनाया जाने वाला पावन पर्व गंगा दशहरा इस वर्ष हस्त नक्षत्र के दुर्लभ संयोग में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां गंगा का अवतरण हस्त नक्षत्र में ही हुआ था, इसलिए इस दिन गंगा स्नान, दान और उपवास का विशेष महत्व माना जाता है। वाल्मीकिनगर स्थित नारायणी नदी के संगम तट कौलेश्वर घाट पर सोमवार सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। बिहार और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने पवित्र नारायणी नदी में आस्था की डुबकी लगाकर अपने पाप कर्मों से मुक्ति तथा पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। “हर-हर गंगे” और “बोल बम” के जयघोष से पूरा संगम तट भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। ब्रह्मपुराण में वर्णित है कि हस्त नक्षत्र से युक्त ज्येष्ठ शुक्ल दशमी दस प्रकार के पापों का नाश करती है, इसलिए इसे “दशहरा” कहा जाता है। शास्त्रों में बताए गए दस पापों में चोरी, हिंसा, परस्त्री गमन, कटु वचन, झूठ बोलना, चुगली करना, व्यर्थ बातें करना, दूसरों की वस्तु पर अन्यायपूर्ण दृष्टि रखना, अनिष्ट चिंतन और नास्तिक बुद्धि प्रमुख माने गए हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान और दान-पुण्य करने से मनुष्य को इन पापों से मुक्ति मिलती है।

कौलेश्वर घाट पर सुबह से श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। विशेष रूप से आदिवासी बहुल क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग स्नान के लिए पहुंचे। महिलाओं की उपस्थिति पुरुषों की अपेक्षा अधिक रही। श्रद्धालुओं ने बताया कि दो मास होने के कारण मंगलवार तक भी स्नान और पूजा-अर्चना का क्रम जारी रहेगा। गंगा स्नान के साथ श्रद्धालु विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक भी कर रहे हैं। पंडित जगदीश उपाध्याय ने बताया कि गंगा दशहरा के दिन जल, अन्न और वस्त्र का दान अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। इस दिन किया गया दान मनुष्य के जीवन में सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है। गंगा स्नान के बाद संगम तट पर महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं ने सामूहिक भजन-कीर्तन कर वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। महिलाओं द्वारा गाई गई “शिव की लाचारी” और पारंपरिक भजनों ने लोगों का मन मोह लिया। उमस भरी गर्मी और तेज धूप भी श्रद्धालुओं की आस्था को कम नहीं कर सकी। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रामकोला से आए श्रद्धालु अरविंद मिश्रा ने बताया कि गंगा स्नान के बाद वे लोग शिवालय में रात्रि विश्राम करेंगे तथा मंगलवार को सार्वजनिक भंडारे का आयोजन कर श्रद्धालुओं और जरूरतमंदों को भोजन कराएंगे।










