

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर:- वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) में शिक्षा और प्रकृति का अनोखा संगम देखने को मिला, जब पंडित दीनदयाल उपाध्याय उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय पिपरा कोठी के 20 छात्र दो दिवसीय शैक्षिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत यहां पहुंचे। इस दौरान छात्रों को जंगल, वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। बाल्मीकिनगर स्थित वन विभाग के सभागार में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान से जोड़ना था। वन विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने छात्रों को वीटीआर की जैव विविधता, वन प्रबंधन और संरक्षण के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। प्रशिक्षण के दौरान छात्रों ने जंगल में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधों, वनस्पतियों और वन्यजीवों के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम में डब्ल्यूटी के सीनियर फील्ड ऑफिसर पावेल घोष, शांतम ओझा, फील्ड असिस्टेंट सुनील कुमार तथा डब्लू डब्लू एफ के बायोलॉजिस्ट अरुण चौधरी ने छात्रों को विभिन्न विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि वीटीआर न केवल बिहार बल्कि देश के प्रमुख संरक्षित वन क्षेत्रों में से एक है, जहां जैव विविधता की समृद्धता देखने को मिलती है। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य एस एन सिंह और डॉ. ममता खेपर ने बताया कि बीएससी ऑनर्स (फोर्थ सेमेस्टर) के छात्र इस प्रशिक्षण के माध्यम से अपने पाठ्यक्रम से जुड़े विषयों को व्यवहारिक रूप में समझने आए हैं।

उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण से छात्रों को किताबों से परे वास्तविक अनुभव मिलता है, जो उनके भविष्य के करियर के लिए बेहद उपयोगी साबित होता है। प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को जंगल में संरक्षण की चुनौतियों, वन्यजीवों के व्यवहार, पर्यावरण संतुलन और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी जानकारी दी गई। साथ ही, उन्हें यह भी बताया गया कि किस प्रकार वैज्ञानिक तरीके से वन प्रबंधन किया जाता है और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग कैसे सुनिश्चित किया जा सकता है। छात्रों ने इस प्रशिक्षण को बेहद ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताया। उनका कहना था कि इस तरह के कार्यक्रम उन्हें पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाते हैं और प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित करते हैं। कुल मिलाकर, यह दो दिवसीय शैक्षिक प्रशिक्षण कार्यक्रम छात्रों के लिए एक यादगार अनुभव साबित हुआ। इससे न केवल उनकी अकादमिक समझ मजबूत हुई, बल्कि उन्हें प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति नई दृष्टि भी मिली।










