

जिला ब्यूरो विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर:- वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) के घोठवा टोला गांव से सटे जंगलों में शुक्रवार की देर शाम भीषण आग लगने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। फायर सीजन की शुरुआत में ही सामने आई इस घटना ने वन विभाग की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आग तेजी से फैलते हुए गांव की सीमा तक पहुंच गई थी, लेकिन समय रहते वनकर्मियों की तत्परता से एक बड़ा हादसा टल गया।
जानकारी के अनुसार, वीटीआर के कक्ष संख्या टी-33 के जंगलों में अचानक आग भड़क उठी। शुरुआती दौर में छोटी दिखने वाली आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। तेज हवा के कारण आग की लपटें तेजी से फैलने लगीं और उसका रुख गांव की ओर हो गया। इससे आसपास के इलाके में दहशत का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और तत्काल राहत कार्य शुरू किया गया। आग को नियंत्रित करने के लिए घंटों तक लगातार प्रयास किए गए। कठिन परिस्थितियों के बावजूद टीम ने आखिरकार आग पर काबू पा लिया और उसे आबादी क्षेत्र तक पहुंचने से रोक दिया। अगर थोड़ी भी देर होती, तो आग गांव में प्रवेश कर भारी जन-धन नुकसान का कारण बन सकती थी। गौरतलब है कि फायर सीजन की शुरुआत होते ही वीटीआर के जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। अब तक कई एकड़ वन क्षेत्र आग की चपेट में आ चुका है, जिससे लाखों रुपये की वन संपदा जलकर राख हो गई है। इसके साथ ही वन्यजीवों पर भी इसका गहरा असर पड़ रहा है। बड़े जानवर तो किसी तरह सुरक्षित स्थानों की ओर निकल जाते हैं, लेकिन छोटे जीव-जंतु और पक्षी अक्सर आग की चपेट में आकर जान गंवा देते हैं।
इस घटना ने वन विभाग की तैयारियों और रोकथाम के उपायों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल आग लगने की घटनाएं होती हैं, लेकिन इनके स्थायी समाधान की दिशा में पर्याप्त प्रयास नहीं दिखते। हालांकि, इस संबंध में वाल्मीकिनगर रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि आग की सूचना मिलते ही विभाग की टीम तुरंत सक्रिय हो जाती है। आग बुझाने के साथ-साथ इसके कारणों की भी जांच की जाती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए लगातार रणनीति बनाई जा रही है। फिलहाल, घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है। वन विभाग अलर्ट मोड में है, लेकिन लगातार बढ़ती आग की घटनाएं आने वाले समय के लिए गंभीर चेतावनी भी दे रही हैं।










