

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह,
बेतिया/वाल्मीकिनगर:- वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के घने जंगलों में अब पर्यटकों का सफर पहले से कहीं अधिक आरामदायक, रोमांचक और सुगम हो गया है। बिहार के ‘कश्मीर’ के रूप में प्रसिद्ध वाल्मीकिनगर में इन दिनों प्रतिदिन सैकड़ों पर्यटक पहुंच रहे हैं, जो अपने परिवार के साथ प्राकृतिक सुंदरता, शुद्ध हवा और शांत वातावरण का भरपूर आनंद ले रहे हैं। वन विभाग द्वारा हाल ही में की गई नई व्यवस्थाओं ने यहां के पर्यटन अनुभव को एक नई ऊंचाई प्रदान की है। वन भ्रमण की सुविधा को बेहतर बनाने के लिए विभाग ने जंगल सफारियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की है। पहले जहां केवल 9 सफारियां उपलब्ध थीं, वहीं अब इनकी संख्या बढ़ाकर 18 कर दी गई है। इनमें 8 नई लग्जरी सफारियां शामिल की गई हैं, जो आधुनिक तकनीक, आकर्षक डिजाइन और आरामदायक सीटों से लैस हैं। इन सफारियों का संचालन प्रतिदिन जंगल कैंप से किया जा रहा है, जिससे अब पर्यटकों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता और वे आसानी से अपनी बारी पर जंगल भ्रमण का आनंद ले पा रहे हैं। इन अत्याधुनिक लग्जरी सफारियों को 6 अप्रैल को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया था। इसके बाद से ही ये सफारियां पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बन गई हैं। पर्यटक खास तौर पर इन नई सफारियों में बैठकर जंगल के भीतर वन्यजीवों और प्राकृतिक दृश्यों को करीब से देखने के लिए उत्साहित नजर आ रहे हैं। पहले सफारियों की सीमित संख्या के कारण देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता था। टिकट लेने के बावजूद उन्हें अपनी बारी के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता था, जिससे उनका कीमती समय बर्बाद होता था और उत्साह भी कम हो जाता था। लेकिन अब सफारियों की संख्या बढ़ने से यह समस्या काफी हद तक समाप्त हो गई है और पर्यटन व्यवस्था अधिक व्यवस्थित एवं सहज हो गई है। हालांकि, जहां जंगल सफारी की सुविधा ने पर्यटकों को राहत दी है, वहीं दूसरी ओर राफ्टिंग सेवा बंद होने से कुछ हद तक निराशा भी देखी जा रही है। गंडक नदी में जल स्तर कम होने के कारण वन विभाग ने फिलहाल राफ्टिंग गतिविधियों को स्थगित कर दिया है। इससे न केवल पर्यटकों को रोमांचक जल गतिविधि से वंचित होना पड़ रहा है, बल्कि विभाग को प्रतिदिन हजारों रुपये के राजस्व का नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। कई पर्यटक बिना जानकारी के राफ्टिंग घाट पहुंच जाते हैं और नौका विहार की मांग करते हैं, लेकिन सेवा बंद होने की जानकारी मिलने पर उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ता है। इसके बावजूद, वाल्मीकिनगर के अन्य दर्शनीय स्थलों और जंगल सफारी का अनुभव उन्हें संतुष्टि प्रदान कर रहा है। समग्र रूप से देखा जाए तो वाल्मीकिनगर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए वन विभाग द्वारा उठाए गए कदम अत्यंत सराहनीय हैं। लग्जरी सफारियों की शुरुआत ने न केवल पर्यटकों की सुविधा को बढ़ाया है, बल्कि इस क्षेत्र को एक प्रमुख इको-टूरिज्म हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी मजबूत कदम साबित हो रही है।










