

मोटर से लैस टैंकर से जंगल की आग बुझाने में भी मिलेगी मदद
जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर: भीषण गर्मी के मौसम में जंगलों में पानी की कमी से जूझ रहे वन्यजीवों को राहत देने के लिए वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) प्रशासन ने विशेष तैयारी की है। अब जंगल में रहने वाले टाइगर और अन्य वन्यजीवों को पीने और नहाने के लिए टैंकर से पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए वीटीआर में नया पानी टैंकर पहुंच चुका है, जिससे जंगल के विभिन्न वाटर होल में पानी भरा जाएगा। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह टैंकर केवल जल स्रोतों को भरने के लिए ही नहीं बल्कि जंगल में लगने वाली आग पर काबू पाने के लिए भी उपयोगी साबित होगा। टैंकर में मोटर लगी हुई है, जिसकी मदद से कम समय में पानी का छिड़काव कर आग को नियंत्रित किया जा सकेगा। गर्मियों के दिनों में जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं, ऐसे में यह टैंकर वनकर्मियों के लिए काफी सहायक साबित होगा।
दरअसल, गर्मी के मौसम में जंगल के कई प्राकृतिक जल स्रोत धीरे-धीरे सूखने लगते हैं। इससे वन्यजीवों के सामने पानी का संकट खड़ा हो जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने पहले से तैयारी शुरू कर दी है, ताकि जंगल में रहने वाले बाघ, तेंदुआ, भालू , हिरण, जंगली सुअर, गोर और अन्य वन्यजीवों को दिनभर ताजा पानी उपलब्ध कराया जा सके।
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की प्यास बुझाने के लिए 100 से अधिक छोटे-बड़े जल स्रोत बनाए गए हैं। इनमें पक्के और कच्चे दोनों प्रकार के वाटर होल शामिल हैं। इन वाटर होल में करीब दो से तीन हजार लीटर तक पानी जमा हो सकता है। बरसात के मौसम में इनमें वर्षा का पानी भर जाता है, लेकिन गर्मी के दिनों में जब यह पानी सूखने लगता है तो टैंकर के माध्यम से इन्हें दोबारा भर दिया जाता है। वन क्षेत्र पदाधिकारी (रेंजर) सत्यम कुमार ने बताया कि वन्यजीवों के लिए पानी की व्यवस्था को लेकर विभाग ने विशेष योजना बनाई है। जंगल के कई इलाकों में सीमेंटेड वाटर होल बनाए गए हैं, जहां सोलर पंप की मदद से दिनभर ताजा पानी निकलता रहता है। इससे जंगली जानवर पानी पीने के साथ-साथ स्नान भी कर सकते हैं और गर्मी से राहत पा सकते हैं। बता दें कि वाल्मीकि टाइगर रिजर्व बिहार का इकलौता टाइगर रिजर्व है। गर्मियों के दिनों में यह क्षेत्र पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाता है। देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यटक यहां जंगल सफारी और वन्यजीवों को देखने के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में वन विभाग का प्रयास है कि जंगल में रहने वाले सभी वन्यजीवों को पर्याप्त पानी मिल सके और उनका प्राकृतिक आवास सुरक्षित बना रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जंगल में पानी की कमी हो जाए तो जंगली जानवर पानी की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख करने लगते हैं। इससे इंसानों और वन्यजीवों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। कई बार जंगली जानवर ग्रामीणों के गुस्से का शिकार भी बन जाते हैं। इन्हीं संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए वीटीआर प्रशासन ने पानी की बेहतर व्यवस्था की है। प्राकृतिक रूप से भी वाल्मीकि टाइगर रिजर्व को कई नदियों का वरदान मिला है। यहां तमसा, सोनभद्र और गंडक जैसी नदियां साल भर बहती रहती हैं, जिनमें भीषण गर्मी के दौरान भी पर्याप्त पानी उपलब्ध रहता है। इसके अलावा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक छोटे-बड़े प्राकृतिक जल स्रोत भी मौजूद हैं। वीटीआर क्षेत्र में सात प्रमुख पहाड़ी नदियां भी बहती हैं, जिनमें गुजरी, मनोर, भपसा, झिकैरी, रोहुआ, हरहा, मसान और पंडई प्रमुख हैं। हालांकि इनमें से अधिकतर नदियां बरसाती हैं और गर्मियों के दिनों में सूख जाती हैं। ऐसे में वन विभाग ने ग्रासलैंड और दूरस्थ जंगल क्षेत्रों में कृत्रिम वाटर होल बनाकर वन्यजीवों के लिए पानी की व्यवस्था की है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पुराने वाटर होल की साफ-सफाई कर उन्हें फिर से जीवंत किया गया है। वहीं बरसात के दौरान क्षतिग्रस्त हो चुके कच्चे वाटर होल की भी मरम्मत कराई गई है, ताकि गर्मी के पूरे मौसम में जंगल के जानवरों को पानी की कमी का सामना न करना पड़े।










