

जिला ब्यूरो विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर:- किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से वाल्मीकिनगर थाना क्षेत्र के लक्ष्मीपुर रमपुरवा पंचायत अंतर्गत लक्ष्मीपुर गांव में बुधवार को विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।एचडीएफसी बैंक परिवर्तन के सहयोग से महात्मा गांधी सेवा आश्रम, जौरा द्वारा संचालित “सक्षम प्रोजेक्ट” के तहत आयोजित इस दो दिवसीय एक्सपोज़र विजिट में क्षेत्र के किसानों को मशरूम उत्पादन सहित विभिन्न उन्नत कृषि पद्धतियों की विस्तृत जानकारी दी गई। इस कार्यक्रम में वाल्मीकिनगर क्षेत्र के छह गांव—लक्ष्मीपुर, रमपुरवा, चरघरिया, संतपुर, दरुआबारी और ठाड़ी के कुल 48 किसानों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को खेती के आधुनिक तरीकों से अवगत कराया गया, ताकि वे पारंपरिक खेती के साथ-साथ नई तकनीकों को अपनाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकें। कृषि वैज्ञानिक डॉ. विनय कुमार सिंह ने किसानों को मिश्रित खेती की पद्धति, मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक विधि तथा अनुकूल मौसम में बेहतर उत्पादन के तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मशरूम की खेती कम लागत में अधिक लाभ देने वाली खेती है, जिसे छोटे किसान भी आसानी से अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकते हैं। इसके अलावा उन्होंने मिट्टी परीक्षण के महत्व को समझाते हुए किसानों को बताया कि मिट्टी की गुणवत्ता के अनुसार ही फसल का चयन करना चाहिए, जिससे उत्पादन और लाभ दोनों बढ़ते हैं। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को केला, लीची और आम की उन्नत खेती, देशी अरहर की खेती, स्ट्रॉबेरी उत्पादन, सब्जी उत्पादन और मिर्च की नेट फार्मिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के बारे में भी जानकारी दी गई। किसानों को संबंधित कृषि इकाइयों का प्रत्यक्ष अवलोकन भी कराया गया, जिससे उन्हें इन तकनीकों को व्यवहारिक रूप से समझने का अवसर मिला।

कार्यक्रम के दौरान महात्मा गांधी सेवा आश्रम, जौरा के प्रबंधक प्रफुल्ल कुमार श्रीवास्तव ने किसानों को कृषि के साथ अतिरिक्त आय के स्रोत के रूप में मधुमक्खी पालन अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि मधुमक्खी पालन से शहद उत्पादन के साथ-साथ फसलों के परागण में भी वृद्धि होती है, जिससे कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है। वहीं सक्षम प्रोजेक्ट के बिहार राज्य समन्वयक दुर्गेश कुमार ने किसानों को प्रोजेक्ट के उद्देश्यों और इसकी विभिन्न गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ना और उनकी आय बढ़ाने के लिए उन्हें प्रशिक्षण एवं संसाधन उपलब्ध कराना है। प्रोजेक्ट के थीम एक्सपर्ट विकास पांडेय ने किसानों को मिलेट्स यानी श्री अन्न की खेती, उसके पोषण महत्व और बाजार में बढ़ती मांग के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि मिलेट्स की खेती से किसानों को अच्छा मुनाफा मिल सकता है और यह स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी है।
इस एक्सपोज़र विजिट की खास बात यह रही कि इसमें लगभग 50 प्रतिशत भागीदारी थारू समुदाय की महिला किसानों की रही। इससे यह स्पष्ट होता है कि क्षेत्र में महिलाएं भी कृषि गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रोजेक्ट के विलेज मोटिवेटर अनिता देवी, राहुल कुमार, भूपेन्द्र काजी और अतुल कुमार सिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा। आयोजकों का कहना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को नई कृषि तकनीकों से परिचित कराने के साथ-साथ उनकी आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।










