हमर बगिया के सुंदर सुगनवा कहवां उड़ गइले हो’

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सड़क हादसे में 17 वर्षीय गौतम की मौत से दहला वाल्मीकिनगर

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह,

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- गुरुवार की देर रात वाल्मीकिनगर-बगहा मुख्य पथ पर टंकी बाजार के समीप हुए दर्दनाक सड़क हादसे में घायल 17 वर्षीय किशोर गौतम कुमार की शनिवार देर रात इलाज के दौरान मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे वाल्मीकिनगर को शोक में डुबो दिया है। तीन दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद आखिरकार गौतम ने दम तोड़ दिया, जिससे परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
मृतक गौतम कुमार, पिता सुरेंद्र शाह, ग्राम टंकी बाजार वाल्मीकिनगर का निवासी था। गुरुवार की रात वह अपने दोस्त की बहन की शादी में शामिल होने चरघरिया गांव गया था। रात करीब 10 बजे शादी समारोह से लौटते समय उसकी बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक पेड़ से जा टकराई। बाइक पर उसके साथ महेंद्र मुखिया (पिता स्वर्गीय हरि मुखिया), ग्राम ठाढ़ी थाना वाल्मीकिनगर निवासी, भी सवार था। हादसे में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। गौतम की हालत नाजुक बनी रही और तीन दिन के इलाज के बाद उसने दम तोड़ दिया, जबकि महेंद्र अभी भी जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। गौतम की मौत की खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया। मां का विलाप सुनकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। वह बार-बार बेहोश होते हुए कह रही थीं— “हमर बगिया के सुंदर सुगनवा, कहवां उड़ गइले हो।” यह मार्मिक दृश्य देख उपस्थित लोगों का कलेजा कांप उठा। गौतम अपने माता-पिता के दो बेटों में सबसे छोटा था। बड़ा भाई गोविंद ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहा है और टंकी बाजार स्थित पान की छोटी सी दुकान संभालता है। परिवार में दो बहनें भी हैं, जिनमें एक की शादी हो चुकी है, जबकि दूसरी की शादी आगामी अप्रैल में तय थी। बहन के हाथों में मेहंदी रचने से पहले ही छोटे भाई की असमय मौत ने खुशियों को मातम में बदल दिया। बहन का भी रो-रोकर बुरा हाल है। गौतम के पिता सुरेंद्र शाह मेहनतकश व्यक्ति हैं। परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने के लिए वे पिछले पांच वर्षों से विदेश में काम कर रहे थे। पहले भुजा और फिर पान की दुकान चलाकर उन्होंने बच्चों को पढ़ाने-लिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनकी मेहनत और सपनों पर इस हादसे ने गहरा आघात पहुंचाया है। इस दुखद घटना से आक्रोश और शोक में डूबे टंकी बाजार के व्यापारियों ने शनिवार को दोपहर तक अपनी दुकानें बंद रखीं और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सड़क सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू करने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। गौतम की असमय मौत ने न केवल एक परिवार की खुशियां छीन लीं, बल्कि पूरे वाल्मीकिनगर को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सड़क पर जरा सी लापरवाही किस तरह जिंदगी को पल भर में खत्म कर सकती है।

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