



जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह,
बेतिया/वाल्मीकिनगर:- रविवार का दिन वाल्मीकिनगर के लिए पर्यटन की दृष्टि से अद्भुत और अविस्मरणीय साबित हुआ। सुबह से ही दर्जनों बसों और करीब 50 चारपहिया वाहनों से पहुंचे लगभग 05 हजार पर्यटकों ने पूरे क्षेत्र को गुलजार कर दिया। टंकी बाजार से लेकर गोल चौक तक वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं। हालांकि, पर्यटकों की भारी आमद से स्थानीय व्यापारियों के चेहरे खुशी से खिल उठे।
वाल्मीकिनगर की प्राकृतिक छटा और शांत वातावरण सैलानियों को हमेशा आकर्षित करता रहा है, लेकिन रविवार को उमड़ी भीड़ ने अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। स्थानीय निवासी और प्रकृति प्रेमी प्रेम कुमार ने बताया कि उन्होंने इतनी बड़ी संख्या में पर्यटकों को एक साथ पहले कभी नहीं देखा। उनके अनुसार, पर्यटन में हो रही यह तेजी वाल्मीकिनगर की पहचान को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूत करेगी। पर्यटकों की भीड़ का सबसे अधिक असर टंकी बाजार और आसपास के दुकानों पर देखा गया। खासकर मांसाहारी भोजन बनाने के लिए खरीदारी करने वालों की भीड़ चिकन, मटन और किराना दुकानों पर उमड़ी रही। गोल चौक से जंगल कैंप तक आने-जाने में लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन उत्साह और उल्लास का माहौल हर ओर देखने को मिला। स्थानीय व्यापारियों ने इसे अपने लिए वरदान बताया और कहा कि पर्यटक उनके व्यापार को नई ऊर्जा दे रहे हैं।

मैत्री क्रिकेट मैच ने बनाया दिन को खास
रविवार को वाल्मीकिनगर भ्रमण पर आए सीतामढ़ी और गोपालगंज में कार्यरत भारत फाइनेंस कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों ने अपने दौरे को यादगार बनाने के लिए मैत्री क्रिकेट मैच का आयोजन किया। नदी घाटी योजना उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर में 20-20 ओवर का रोमांचक मुकाबला खेला गया। सीतामढ़ी टीम के कप्तान मनीष कुमार ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का निर्णय लिया और निर्धारित ओवरों में 80 रन बनाए। जवाब में गोपालगंज क्लस्टर टीम ने 81 रन का लक्ष्य 18 ओवर में 5 विकेट खोकर हासिल कर लिया और 5 विकेट से जीत दर्ज की। मैच के दौरान खिलाड़ियों और दर्शकों में जबरदस्त उत्साह देखा गया। प्राकृतिक स्थलों पर उमड़ी भीड़ पर्यटकों ने धार्मिक स्थलों के साथ-साथ इको पार्क, कौलेश्वर झूला पुल और इंडो-नेपाल बॉर्डर स्थित गंडक बैराज की मनोरम वादियों का भरपूर आनंद लिया। हरे-भरे जंगलों और नदी की लहरों के बीच सैलानी खुद को प्रकृति की गोद में पाकर अभिभूत नजर आए। पर्यटक आमिष और निरामिष भोजन बनाने में जुटे रहे, जिससे पिकनिक स्थल उत्सव में बदल गए। इंडो-नेपाल सीमा पर स्थित गंडक बैराज की सुंदरता को निहारते हुए कई पर्यटकों ने गोवा जैसी प्राकृतिक अनुभूति होने की बात कही। दिनभर की चहल-पहल के बाद शाम ढलते-ढलते वाल्मीकिनगर ने एक और यादगार रविवार अपने नाम कर लिया। पर्यटन की इस बढ़ती रफ्तार ने साबित कर दिया कि वाल्मीकिनगर आने वाले समय में बिहार का प्रमुख पर्यटन केंद्र बनने की ओर तेजी से अग्रसर हो रहा है।










