



वन विभाग के सौजन्य से फसल सुरक्षा के लिए लगाए जा रहे सुरक्षित मचान
जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर:- वीटीआर जंगल से सटे गांवों के किसानों की वर्षों पुरानी समस्या के समाधान की दिशा में वन विभाग ने नई पहल शुरू की है। जंगली जानवरों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाए जाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए जंगल और खेतों की सीमा पर सुरक्षित मचान लगाए जा रहे हैं। इस पहल से किसानों को न केवल अपनी फसल की सुरक्षा में सहूलियत होगी, बल्कि उनकी जान-माल की रक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी। वन विभाग द्वारा उन स्थानों को चिन्हित किया गया है, जहां जंगली जानवरों की आवाजाही अधिक पाई गई है। खासकर हाथी, नीलगाय, जंगली सूअर और हिरण जैसे जानवर रात के समय खेतों में प्रवेश कर फसलों को भारी नुकसान पहुंचाते रहे हैं। इन संवेदनशील क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर मजबूत और सुरक्षित मचान का निर्माण कराया जा रहा है। वाल्मीकिनगर रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि मचान को पूरी तरह किसानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। उन्होंने कहा कि मचान की ऊंचाई इतनी रखी गई है कि नीचे से जंगली जानवर किसी भी प्रकार का नुकसान न पहुंचा सकें। साथ ही चढ़ने और उतरने के लिए मजबूत सीढ़ी, चारों ओर सुरक्षित घेरा तथा बैठने की समुचित व्यवस्था की गई है। रेंजर ने बताया कि किसान मचान पर बैठकर टॉर्च, सीटी और अन्य पारंपरिक साधनों की मदद से रात में खेतों की निगरानी कर सकेंगे। इससे जंगली जानवरों को खेतों में घुसने से पहले ही दूर भगाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना और दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना है। वनवर्ती किसानों ने वन विभाग की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि लंबे समय से खेतिहर किसान जंगली जानवरों द्वारा फसल बर्बादी से परेशान थे। कई बार किसान रात में खेत की रखवाली करते समय जान जोखिम में डालते थे। अचानक जंगली जानवरों के सामने आ जाने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती थी। उन्होंने कहा कि सुरक्षित मचान लगाए जाने से अब किसान ऊंचाई पर सुरक्षित बैठकर खेतों की निगरानी कर सकेंगे, जिससे जान-माल के नुकसान की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो इसे अन्य प्रभावित गांवों में भी लागू किया जाएगा। ग्रामीणों ने भी इस पहल को सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि इससे उनकी मेहनत की कमाई बच सकेगी और आर्थिक नुकसान में कमी आएगी। वन विभाग की यह नई पहल किसानों के लिए राहत भरी खबर है। और भविष्य में मानव-वन्यजीव टकराव को कम करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।










