अल्लाह की रज़ा में डूबा रमजान का पहला जुमा इबादत, रहमत और नेकी का पैग़ाम।

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जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- मुकद्दस माह-ए-रमजान के पहले जुमा पर वाल्मीकिनगर की मस्जिदों में अकीदतमंद रोजेदारों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही इबादत का सिलसिला शुरू हो गया था और दोपहर तक जामा मस्जिद सहित विभिन्न मस्जिदों में नमाजियों की कतारें नजर आईं। अल्लाह की रज़ा और रहमत की तलब में रोजेदार पूरे दिन इबादत-ए-इलाही में मशगूल रहे। रमजान के पहले जुमा को लेकर मुस्लिम समाज में विशेष उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला।

जामा मस्जिद में उमड़ी अकीदतमंदों की भीड़

जुमे की नमाज अदा करने के लिए नमाजी तय समय से पहले ही मस्जिदों में पहुंचने लगे थे। वजू कर लोग सफों में बैठकर खुतबा सुनते रहे। जामा मस्जिद में इमाम साहब ने रमजान की फजीलत और जुमा की अहमियत पर रोशनी डाली। नमाज के दौरान मस्जिद खचाखच भरी रही और कई लोग बाहर तक सफ बनाकर खड़े नजर आए। मस्जिदों में फर्ज नमाजों के साथ-साथ नफ्ल नमाजों का भी एहतमाम किया गया। तिलावत-ए-कुरआन, तस्बीह और जिक्र की आवाजों से माहौल रूहानी बना रहा। रोजेदारों ने अल्लाह से रहमत, मगफिरत और बरकत की दुआएं मांगीं। पूरे दिन इबादत और नेकियों में गुजारने का संकल्प लिया गया।

“सिर्फ भूखे रहने का नाम नहीं है रोजा”

जामा मस्जिद के इमाम ने अपने बयान में कहा कि रोजा केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं, बल्कि यह अपने किरदार और अमल को सुधारने का जरिया है। उन्होंने कहा, “असल रोजा वही है जिससे अल्लाह राजी हो जाए। जब हाथ उठे तो भलाई के लिए उठे, कान सुने तो अच्छी बातें सुनें, आंखें देखें तो जायज चीजें देखें और कदम बढ़ें तो नेकी की राह पर बढ़ें।”
इमाम साहब ने बताया कि इस्लाम में पांच वक्त की नमाज फर्ज है, लेकिन जुमा की नमाज का खास महत्व है। हदीस शरीफ में जुमे के दिन को बेहद अफजल बताया गया है। मान्यता है कि इसी दिन हजरत आदम अलैहिस्सलाम को जन्नत से दुनिया में भेजा गया और इसी दिन उनकी वापसी भी हुई। जुमे के दिन अदा की गई नमाज से अल्लाह पूरे हफ्ते की खता को माफ फरमा देता है।

रहमत और बरकत का महीना

ज्ञात हो कि इस वर्ष रमजान का पाक महीना 19 फरवरी से शुरू हुआ है। यह महीना इबादत, सब्र और इंसानियत का पैगाम देता है। इस साल रमजान में कुल पांच जुमा पड़ रहे हैं, जिससे इस बार की रौनक और भी बढ़ गई है। रमजान का पहला जुमा खास माना जाता है, क्योंकि इस दिन मुसलमान अल्लाह की खास रहमत की उम्मीद के साथ सजदे में झुकते हैं। पहले जुमा के मौके पर लोगों ने अपने परिवार, समाज और देश की खुशहाली के लिए दुआएं मांगीं। मस्जिदों के बाहर भी भाईचारे और आपसी मोहब्बत का माहौल नजर आया। रमजान का यह पहला जुमा वाल्मीकिनगर में पूरी अकीदत, एहतराम और रूहानी सुकून के साथ सम्पन्न हुआ।

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