हर-हर महादेव की गूंज से गूंज उठा वाल्मीकिनगर, महाशिवरात्रि गंगा स्नान को पहुंचे सैकड़ों शिव भक्त।

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जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि वाल्मीकिनगर इन दिनों शिवमय हो उठा है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर गंगा स्नान और जलाभिषेक के लिए उत्तर प्रदेश और बिहार के विभिन्न जिलों से शिव भक्तों का जत्था लगातार वाल्मीकिनगर पहुंचने लगा है। त्रिवेणी के संगम तट पर डुबकी लगाकर श्रद्धालु अरेराज स्थित सोमेश्वरनाथ महादेव के जलाभिषेक की तैयारी में जुटे हुए हैं। हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से पूरा इलाका भक्तिमय वातावरण में डूब गया है। करीब 170 किलोमीटर की लंबी दूरी साइकिल से तय कर पहुंचे ये शिव भक्त अपनी अनोखी भक्ति यात्रा से लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। पीली धोती, लाल पगड़ी और साइकिल पर बंधी चटाई के साथ चल रही यह टोली जहां से भी गुजर रही है, वहां श्रद्धा और आस्था की अलख जगा रही है। कड़ाके की ठंड के बावजूद नारायणी नदी के तट पर खुले आसमान के नीचे डेरा डालकर भजन-कीर्तन में लीन शिव भक्तों का उत्साह देखते ही बनता है। मोतिहारी जिले के कोटवा देवी स्थान से आए लगभग 80 शिव भक्तों के दल में शामिल हुकूम यादव, मनोज ठाकुर, बाला प्रसाद यादव के साथ उत्तर प्रदेश के पड़रौना रामकोला निवासी नंदलाल रावत, और कृष्णा प्रसाद ने बताया कि रविवार की सुबह गंगा स्नान के बाद वे अपने-अपने शिवालयों के लिए रवाना होंगे। उन्होंने बताया कि स्नान के बाद सबसे पहले बोल बम मंडली की बैठक होती है, जिसमें यात्रा के दौरान पड़ाव का चयन किया जाता है। इसके बाद जल पूजन, परिक्रमा की विधि और गुरु पूजन संपन्न किया जाता है। तय नियम के अनुसार हर 8 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद ठहराव होता है, ताकि निश्चित समय पर मंदिर पहुंचकर जलाभिषेक किया जा सके। शिव भक्तों ने बताया कि आगामी शुक्रवार को महाशिवरात्रि के दिन वे अरेराज स्थित सोमेश्वर नाथ महादेव का विधिवत जलाभिषेक करेंगे। इसके बाद अपने-अपने गांव लौटकर कन्या पूजन की रस्म अदा की जाएगी। गांव के मंदिरों में भजन-कीर्तन और भंडारे का आयोजन किया जाएगा। खास बात यह है कि जब तक भंडारा संपन्न नहीं हो जाता, तब तक कोई भी कांवर मंडली का सदस्य अपने घर नहीं जाता। साइकिल से यात्रा करने के उद्देश्य पर घोड़ासहन के शिव भक्त अमरदेव सिंह ने बताया कि इससे रास्ते में पड़ने वाले प्रत्येक मंदिर में रुककर भजन-कीर्तन करने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि भक्ति में शरीर को कष्ट देना आवश्यक है, तभी भगवान शिव अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। सार्वजनिक और धार्मिक स्थलों पर ठहराव से साधना में कोई बाधा नहीं आती। वाल्मीकिनगर में उमड़ा यह शिव भक्तों का सैलाब न केवल आस्था की मिसाल पेश कर रहा है, बल्कि आने वाली महाशिवरात्रि को लेकर पूरे क्षेत्र को भक्ति और उल्लास से लबरेज कर दिया है।

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