



बगहा। विकास के दावे जब कागजों से निकलकर जमीनी हकीकत से टकराते हैं, तो तस्वीर अक्सर चौंकाने वाली सामने आती है। ऐसा ही एक मामला पश्चिमी चंपारण जिले के प्रखंड बगहा एक अंतर्गत मझौवा पंचायत से सामने आया है, जहाँ राधेश्याम उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय, कांटा के समीप निर्मित खेल मैदान आज अपनी बदहाली पर सवाल खड़े कर रहा है। जिस मैदान से भविष्य के खिलाड़ियों को निखरना था, वह आज उपेक्षा और अव्यवस्था का प्रतीक बन गया है।

जानकारी के अनुसार, इस खेल मैदान का विधिवत शिलान्यास 19 दिसंबर 2014 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं विजय कुमार द्वारा बड़े उत्साह के साथ किया गया था। मनरेगा योजना के तहत (MIS NO- AV/20465245) इस परियोजना के लिए कुल ₹9,91,338 की राशि स्वीकृत की गई थी। अभिलेखों के मुताबिक इसमें से ₹9,00,538 सामग्री मद और ₹90,800 श्रम मद में खर्च दर्शाया गया है। कागजों में यह योजना पूरी दिखती है, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है।

वर्तमान हालात यह हैं कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद मैदान में खेल गतिविधियों के बजाय चारों ओर गंदगी और कचरे का अंबार दिखाई देता है। मैदान से खिलाड़ियों के पसीने की महक के बजाय दुर्गंध फैल रही है। इससे स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि यह मैदान भविष्य के खिलाड़ियों को तैयार करने के उद्देश्य से बनाया गया था, लेकिन आज यह सिर्फ कागजी खानापूर्ति और सरकारी दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि क्या क्रियान्वयन एजेंसी यानी ग्राम पंचायत और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी सिर्फ शिलापट्ट और बोर्ड लगाने तक ही सीमित थी? मैदान के रखरखाव और उपयोग को लेकर किसी भी स्तर पर गंभीरता नहीं दिखी, जिसका खामियाजा आज क्षेत्र के युवा भुगत रहे हैं।

इस पूरे मामले पर मझौवा पंचायत के मुखिया रुदल मुसहर ने बताया कि बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आगमन की संभावना को देखते हुए इस खेल मैदान में हेलीपैड बनाने के लिए कुछ सामग्री हटाई गई थी। हालांकि मुख्यमंत्री का दौरा नहीं हो सका। इसके बाद किसी तरह सामग्री को पुनः लगाया गया। उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में विधायक और सांसद को अवगत करा दिया गया है। गंदगी के सवाल पर मुखिया ने कहा कि खेल मैदान मूल रूप से स्कूल परिसर में बनना था, लेकिन विद्यालय प्रशासन द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने के कारण इसे सरेह (खुले क्षेत्र) में बनाना पड़ा। इसी वजह से वहां गंदगी फैल रही है। फिलहाल स्थानीय जनता प्रशासन से जवाबदेही तय करने और खेल मैदान के शीघ्र जीर्णोद्धार की मांग कर रही है, ताकि यह मैदान अपने वास्तविक उद्देश्य को पूरा कर सके।










