



जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर:- वाल्मीकिनगर रेंज के आसपास के क्षेत्र में बीते दिनों से आतंक मचाने वाले बाघ को वीटीआर प्रशासन की टीम ने आखिरकार पिंजरे में कैद कर लिया है। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
इस बाबत सीएफ नेशामणि ने बताया कि वन विभाग बाघ संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदाय की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दे रहा है। इस घटना ने एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को उजागर किया है, जिससे निपटने के लिए वन विभाग और अधिक प्रभावी कदम उठा रहा है। जंगल के कानून के मुताबिक ताकतवर और युवा बाघ बूढ़े और कमजोर हो गए बाघों को उनकी सल्तनत से बेदखल कर देते हैं, वृद्ध बाघ अपना इलाका छोड़ इंसानी बस्तियों की तरफ रुख करने लगते हैं। दरअसल जंगल का एक ही कानून है, जो ताकतवर है वही राज करेगा। जंगल के इसी कानून के तहत वीटीआर के जंगलों में ताकतवर और खूंखार बाघों के बीच अक्सर घमासान मचता रहता है।
सल्तनत गई तो शिकार भी बदला
वीटीआर में बाघों की संख्या अधिक हो चुकी है, यह बात वन्य जीव संरक्षण के लिहाज से खुशी देने वाली तो है, लेकिन उससे ज्यादा चिंता पैदा करने वाली भी है।ऐसा इसलिए क्योंकि बाघ ऐसा वन्य जीव है, जो अकेले रहना पसंद करता है इस बीच कोई प्रतिद्वंदी उसके सामने आ जाएं तो आपसी संघर्ष का होना तय है। उम्र दराज होने की वजह से यह बाघ तेज भागने वाले वन्यजीवों का शिकार नहीं कर पा रहा था। इस वजह से वह वाल्मीकिनगर के आस-पास रिहायशी क्षेत्रों में पहुंच पालतू पशुओं पर हमला कर रहा था।
औसत उम्र पूरी, टूट गई थी केनाइन
रेस्क्यू किया गया बाघ बूढ़ा हो चला था। उम्रदराज होने के साथ आपसी लड़ाई में उसके जबड़े की एक केनाइन उखड़ चुकी थी। उम्र ज्यादा होने की वजह से वह जंगल में शिकार नहीं कर पा रहा था। पिछले कई दिनो से भूख मिटाने के लिए गांव में घुसकर पालतू पशुओं को अपना शिकार बना रहा था।
बढ़ती संख्या और कम पड़ता जंगल का क्षेत्र
वीटीआर में टाइगर की बढ़ती संख्या ही खुद बाघ और आस पास के लोगों के लिए समस्या बन गई है। लगभग 900वर्ग किलोमीटर में फैले वीटीआर में 2018 में इनकी संख्या 31 थी जो अब 70 से अधिक होने का अनुमान है। वन विभाग के अनुसार एक बाघ के लिए कम से कम 40 से 50 वर्ग किलोमीटर का जंगल क्षेत्र चाहिए। वीटीआर के आसपास का इलाका घनी आबादी वाला है। भोजन और पानी की तलाश में वन्य जीव आबादी वाले इलाके में चले आते हैं।
बाघों की संख्या बढ़ने से उनके लिए जगह कम होती जा रही है।जब कोई बाघ जख्मी या बुढ़ा हो जाता है तब जंगल से निकल कर वह आबादी वाले इलाके में पहुंच जाता है और पशुओं पर हमले करता है।










