बाघ ने गाय को बनाया अपना शिकार, वन विभाग के कर्मियों के साथ बाघ खेल रहा आंख मिचौली।

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जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- वनकर्मी पिछले तीन दिनों से आतंक का पर्याय बने बाघ का रेस्क्यू करने के लिए निगरानी कर रहे थे, वह एक बार फिर हवाई अड्डा के समीप गांव में घुस एक दुधारू गाय को अपना शिकार बना डाला। तीन दिन पूर्व एक वृद्ध बाघ जंगली क्षेत्र में घास चर रहे, एक गाय और एक बछड़े का शिकार किया था। जिसके बाद वन विभाग के कर्मी उसके पग मार्ग के आधार पर निगरानी करना शुरू कर दिया था। बाघ की निगरानी के लिए गोनौली रेंज से भी वनकर्मियों को बुलाया गया था। तीन दिनों तक नर देवी मंदिर जंगल व मृत कैनाल के तार घाट के पास वन कर्मियों की टीम बाघ के लोकेशन के आधार पर लगातार निगरानी कर रहे थे। उसके बाद बाघ शुक्रवार की रात रिहायशी क्षेत्र में पहुंच गया, जहां हवाई अड्डा गांव निवासी बृज बिहारी प्रसाद के दुधारू गाय को अपना शिकार बना डाला। यह घटना शनिवार अहले सुबह की है। पशुपालक बृज बिहारी प्रसाद ने बताया कि गाय को चारा खिलाने के लिए सुबह में जब मैं बंगले के पास पहुंचा, तो बाघ गौशाला के बगल में लगे गन्ने के फसल में घुस गया। जिसका लोकेशन भी गांव के समीप ही है। पशुपालक के अनुसार बंगले से निकलने और घुसने का पग मार्क भी देखा गया है। जिसकी जांच वन विभाग के कर्मियों द्वारा किया गया। इस घटना की सूचना के बाद बायोलॉजिस्ट सौरभ वर्मा, वनरक्षी कुंदन कुमार, शुभम कुमार, सूरज कुमार के साथ टाइगर ट्रैक्टर टीम घटनास्थल पर पहुंच बाघ के पगमार्क के आधार पर छानबीन शुरू कर दिया।

बाघ के रेस्क्यू के लिए लगाए गए हैं तीन पिंजरे

वन विभाग द्वारा बाघ का रेस्क्यू करने के लिए इस घटना से पूर्व ही तैयारियां शुरू कर दी गई थी। विभाग द्वारा गनौली रेंज सहित वाल्मीकिनगर रेंज के जंगल में तीन जगहों पर पिंजरा लगाकर, उसमें बछड़े को बांधा गया है। पिंजरे में बछड़े को रखने उद्देश्य बाघ को लालच देकर पिंजरे में कैद करना है। इसके लिए विभाग ने बछड़े को खरीद उस पिंजरे में बंधा है। परंतु बाघ उससे पहले अपना लोकेशन बदल लिया है। जिससे वन अधिकारियों की नींद हराम हो गई है। स्थानीय लोग भी रिहायशी क्षेत्र में बाघ के आने के बाद भय के माहौल में रात गुजार रहे हैं। सबसे ज्यादा खतरा पशुपालकों के ऊपर मंडरा रहा है।

वृद्ध हो चला है बाघ

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार बाघ वृद्धि हो चला है। विभाग उसका रेस्क्यू कर किसी अन्य सुरक्षित जगह ले जाने की योजना बन चुका है। इसलिए वन विभाग द्वारा लगातार बाघ पर नजर बनाई जा रही है। अब बाघ को पटना, देहरादून या अन्यत्र कहीं ले जाएगा इसके बारे में जानकारी नहीं मिल पाई है।

बोले रेंजर

आतंक का पर्याय बने वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में रहने वाले बाघ के बारे में अधिकारियों द्वारा कुछ भी बताने से गुरेज किया जा रहा है। रेंजर अमित कुमार ने बताया कि बाघ बराबर अपना लोकेशन बदल रहा है। शनिवार की सुबह एक और गाय को अपना शिकार बनाया है। पग मार्क के आधार पर उसकी खोजबीन की जा रही है। इसके लिए दर्जनों वनकर्मियों को लगाया गया है। पशुपालक द्वारा आवेदन देने के बाद मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

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