



स्वरांजलि सेवा संस्थान के संरक्षक एवं धर्मगुरु गुरु वशिष्ठ जी महाराज के शिष्य हैं विजयशाही
जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर :- सीमावर्ती नेपाल के महलवारी निवासी प्रसिद्ध आध्यात्मिक संत एवं अंतर्राष्ट्रीय न्यास स्वरांजलि सेवा संस्थान के धर्मगुरु धर्मपाल गुरु वशिष्ठ जी महाराज के प्रिय शिष्य विजयशाही ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है। इस खबर से वाल्मीकिनगर एवं सीमावर्ती नेपाल के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है। विदित हो कि भारत में नेपाल के राजदूत डॉ. शंकर पी. शर्मा ने नेपाल के कालीकोट निवासी विजय शाही को योग में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड का प्रमाण पत्र प्राप्त करने पर भारत स्थित नेपाल दूतावास में सम्मानित किया। विजय शाही ने लगातार 27 मिनट 3 सेकंड तक ऊर्ध्व पद्मासन (अपवार्ड लोटस पोज) धारण कर यह रिकॉर्ड स्थापित किया। इस उपलब्धि के माध्यम से उन्होंने असाधारण शारीरिक सहनशक्ति और मानसिक अनुशासन का प्रदर्शन किया। उनकी इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए राजदूत शर्मा ने शाही की समर्पण भावना की सराहना की, और कहा कि यह उपलब्धि नेपाल के लिए गर्व का विषय है। साथ ही यह योग और वैलनेस के देश की समृद्ध परंपरा को भी उजागर करती है। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने पूर्व में आकाश बागेपली द्वारा बनाए गए 20 मिनट 36 सेकंड के रिकॉर्ड को तोड़ दिया। विजयशाही की असाधारण सफलता पर पतंजलि के योग गुरु स्वामी रामदेव बाबा एवं आचार्य बालकृष्ण ने भी उन्हें विशेष रूप से सम्मानित करते हुए बधाइयां दी है। योग एवं साधना के क्षेत्र में उनकी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि की चारों ओर प्रशंसा हो रही है। विजय शाही के गुरु एवं मार्गदर्शक धर्मपाल गुरु वशिष्ठ जी महाराज ने बताया कि विजयशाही के भीतर एक दिव्य अलौकिक प्रतिभा विद्यमान है ।आगे उन्होंने बताया कि विजयशाही किसी भी पुस्तक को मात्र 5 मिनट तक अवलोकन करने के बाद पुस्तक बंद करके भी उसमें लिखित समस्त विषय वस्तु को सटीक रूप से बता सकते हैं ,जो उनकी असाधारण स्मरण शक्ति और साधना का प्रमाण है। गौरतलब है कि इसी वर्ष नारायणी गंडकी महा आरती कार्यक्रम में विजयशाही को उनकी योग साधना और अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि के लिए नारायणी गंडकी सम्मान से भी सम्मानित किया जाएगा। दूरभाष पर विजय शाही ने बताया कि भारत के गायक और स्वरांजलि सेवा संस्थान के संस्थापक डी.आनंद ने भी लगातार हमारी साधना को प्रोत्साहित करने का काम किया है। नारायणी गंडकी महाआरती में भी हमारी सफलता हेतु प्रार्थना की जाती रही है। यह सम्मान न केवल विजयशाही की साधना का बल्कि भारत नेपाल की साझा आध्यात्मिक परंपरा और योग संस्कृति का भी प्रतीक होगा।

योग के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने वाले मित्र देश काठमांडू नेपाल वासी विजयशाही की उपलब्धि युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन रही है। और यह सिद्ध करती है कि अनुशासन साधना और गुरु कृपा से असंभव को भी संभव किया जा सकता है । पशुपतिनाथ मंदिर परिसर काठमांडू नेपाल में इंजीनियर राम भक्त बाड़े ,रश्मिला पुरी, डॉ. नारायण आचार्य , पवन भट्टराई,राम महाजन एवं विजयशाही के बड़े भाई ने इस अंतरराष्ट्रीय ख्याति पर विजयशाही को बधाइयां दी है। समाजसेवी संगीत आनंद ने बताया कि योग और साधना के क्षेत्र में नेपाल ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। भारत नेपाल सीमा क्षेत्र में सामाजिक व आध्यात्मिक सेवा कार्यों में सक्रिय स्वरांजलि सेवा संस्थान के संरक्षक भी हैं धर्मपाल गुरु वशिष्ठ जी महाराज। उनके मार्गदर्शन में संस्था द्वारा हर महीने की पूर्णिमा तिथि को आयोजित होने वाली गंडकी महाआरती निरंतर श्रद्धालुओं का केंद्र बनी हुई है। योग साधना में लोटस पोज केवल शारीरिक संतुलन ही नहीं बल्कि मानसिक एकाग्रता और उच्च स्तर की साधना का भी उदाहरण है । बिहार की महिला समाजसेवी अंजू देवी ने कहा कि योग साधना किसी चमत्कार से कम नहीं है। योग साधना द्वारा गंभीर बीमारियां भी ठीक हो सकती है। गुरु वशिष्ठ जी महाराज ने कहा कि विजय शाही में बचपन से ही असाधारण योग क्षमता और दिव्य चेतना के गुण दिखाई देते रहे हैं। इनके अंदर विलक्षण प्रतिभा और क्षमता है, ये अल्प समय में किसी भी विषय को आत्मसात करने की अधिक क्षमता रखते हैं ।जो उनकी गहन साधना का परिणाम है । स्वरांजलि सेवा संस्थान से जुड़े व्यक्तित्व लेखक सच्चिदानंद सौरभ, कंप्यूटर इंजीनियर अखिलानंद ,विजय कुमार, फौजी विद्यासागर राणा ,फौजी चंद्र मोहन तिवारी ,सत्येंद्र सिंह , धर्मेंद्र गुप्ता, पटकथा लेखक एम.शफी, मुखिया खूब लाल बड़घडिया ,वर्ल्ड मीडिया इन्फोटेनमेंट के निदेशक राजेश गुप्ता आदि ने विजयशाही की इस ग्लोबल उपलब्धि पर बधाइयां दी है।










