इंडो नेपाल बॉर्डर पर दिखा आस्था का महासंगम, व्रतियों ने चैती छठ पर डूबते सूर्य को दिया अर्घ्य, घाटों पर उमड़ी श्रद्धा की भीड़।

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बेतिया/वाल्मीकिनगर:- थाना क्षेत्र में चैती छठ पर्व को लेकर आस्था और उत्साह का अद्भुत नजारा देखने को मिला। मंगलवार की संध्या छठव्रतधारियों ने डूबते हुए सूर्य को पहला अर्घ्य अर्पित किया। सुबह से ही व्रतियों में खासा उत्साह देखा गया और विभिन्न नदी घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। घाटों पर पहुंचकर छठव्रतधारियों ने पवित्र नदी में स्नान किया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सूर्य देव को अर्घ्य दिया। पूरे वातावरण में भक्ति गीतों और छठ माता के जयकारों से माहौल भक्तिमय बना रहा। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में घाटों पर पहुंचकर डूबते सूर्य और छठी माता की आराधना की। इससे पूर्व ‘नहाए-खाए’ के साथ 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हुआ था। व्रतियों ने संध्या बेला में स्नान कर खरना का प्रसाद ग्रहण किया। प्रसाद के रूप में गेहूं, घी और शक्कर से बने ठेकुआ, चावल और लड्डू तैयार किए गए। इन परसादों को बांस के बने सूप, दौरा और टोकरी में सजाकर अर्घ्य के लिए घाटों पर लाया गया। सूर्यास्त से पहले ही बड़ी संख्या में व्रती महिलाएं और श्रद्धालु घाटों पर एकत्रित हो गए थे। प्रशासन द्वारा भी पर्व को लेकर विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, जिससे श्रद्धालु सुरक्षित रूप से पूजा-अर्चना कर सकें। बुधवार की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही यह चार दिवसीय चैती छठ महापर्व संपन्न होगा। मान्यता है कि यह पर्व समृद्धि, पुत्र प्राप्ति और सुख-शांति की कामना के लिए मनाया जाता है। इस दौरान श्रद्धालु पूरे श्रद्धा और नियम के साथ छठ माता की उपासना करते हैं।

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