तिरहुत प्रमंडल के कमिश्नर ने वन विभाग के अधिकारियों के साथ की बैठक।

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इको सिस्टम में सुधार व धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर भी की गई चर्चा

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) की समृद्ध जैव विविधता और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने के लिए अवांछित गतिविधियों पर रोक लगाने की आवश्यकता है। ये बात तिरहुत प्रमंडल के कमिश्नर गिरिवर दयाल सिंह ने कही। तिरहुत आयुक्त का मानना है कि जंगलों में बढ़ती कमर्शियल गतिविधियां, अवैध निर्माण और अतिक्रमण वीटीआर के इकोलॉजिकल सिस्टम के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। ऐसे में इन गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाना बेहद जरूरी है, ताकि जंगल और वन्यजीव सुरक्षित रह सकें। वाल्मीकि सभागार के मीटिंग हॉल में वन सुरक्षा एवं वन्य जीव संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन बढ़ावा के लिए क्या किया जा सकता है इसके ऊपर डीएफओ विकास कुमार अहलावत सीएफ सत्यम कुमार एवं रेंजर सत्यम कुमार के साथ एक बैठक की। बैठक के दौरान प्रखंड विकास पदाधिकारी बिड्डू कुमार राम भी उपस्थित थे। तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने बताया कि वीटीआर केवल बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश के महत्वपूर्ण टाइगर रिजर्व में शामिल है, जहां बाघों के साथ-साथ कई दुर्लभ वन्यजीव और पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं। इस समृद्ध जैव विविधता को बनाए रखने के लिए जंगलों में अवैध कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध, नियमित चौकसी और सघन पेट्रोलिंग की व्यवस्था और मजबूत करने की जरूरत है। वनकर्मियों को भी आधुनिक संसाधनों से लैस कर जंगलों की निगरानी बढ़ाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वन अधिकारियों का कहना है कि वीटीआर में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ-साथ धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं को भी विकसित किया जा रहा है। इसके लिए वीटीआर को बौद्ध सर्किट और रामायण सर्किट से जोड़ने की योजना पर काम चल रहा है। इससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ धार्मिक महत्व का भी अनुभव कर सकेंगे। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पुरैना धाम तक पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें वाल्मीकिनगर तक लाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। यदि यह योजना सफल होती है तो इससे क्षेत्र में पर्यटन को नया आयाम मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। वाल्मीकिनगर में बने कन्वेंशन सेंटर को भी पर्यटन के दृष्टिकोण से अधिक सक्रिय बनाने की योजना है। इसके साथ ही वीटीआर में आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वन्यजीवों के संरक्षण के लिए जंगलों में वाटर होल यानी जल स्रोतों को भी विकसित किया जा रहा है। गर्मी के दिनों में जंगलों में पानी की कमी होने पर वन्यजीवों को काफी परेशानी होती है। ऐसे में उनकी प्यास बुझाने के लिए प्राकृतिक जल स्रोतों को संरक्षित करने और नए वाटर होल बनाने की आवश्यकता बताई गई है। यदि जंगल की सुरक्षा, वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन विकास के बीच संतुलन बनाए रखा जाए तो वीटीआर न केवल बिहार बल्कि पूरे देश में इको टूरिज्म का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है। इसके लिए प्रशासन, वन विभाग और स्थानीय लोगों के सहयोग से ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

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