

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर:- नेपाल में 5 मार्च को आयोजित संसदीय चुनाव के तहत लोकतंत्र का महापर्व उत्साह और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न हुआ। शाम 6 बजे तक चले मतदान में दोपहर 1:00 बजे तक लगभग 35 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। भारतीय सीमा से सटे पांच नंबर प्रदेश में सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। त्रिवेणी, रानीनगर, महलवारी, गोपीगंज और नरसहिया सहित कई मतदान केंद्रों पर नागरिक अपने-अपने उम्मीदवारों के समर्थन में कतारबद्ध नजर आए। पिछले छह महीनों से नेपाल राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा था। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार के खिलाफ व्यापक जन-आंदोलन हुए, जिनमें कई लोगों की जान भी गई। इसके बाद अंतरिम सरकार का गठन कर हालात को सामान्य करने की कोशिश की गई, जो आंशिक रूप से सफल रही। अब स्थायी सरकार के गठन के उद्देश्य से यह चुनाव कराया गया, जिसमें विभिन्न दलों ने अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे।
पांच नंबर प्रदेश में सीधी टक्कर
सीमा से सटे क्षेत्रों में इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है। नेपाली कांग्रेस और काठमांडू के चर्चित मेयर बालेन शाह की पार्टी के बीच सीधी टक्कर की चर्चा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार युवाओं में बालेन शाह की लोकप्रियता बढ़ी है और उन्हें भारी समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि रुझान इसी दिशा में रहा तो नेपाल को एक युवा नेतृत्व मिल सकता है।
सीमा पर कड़ी चौकसी, 72 घंटे आवागमन बंद
चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा को मंगलवार देर रात से 72 घंटे के लिए सील कर दिया गया था। सुस्ता क्षेत्र, जो भारतीय गांवों से सटा हुआ है और जहां सीमा खुली है, वहां विशेष सतर्कता बरती गई। भारत की ओर से सशस्त्र सीमा बल के जवान लगातार निगरानी में तैनात रहे, जबकि नेपाल की ओर से नेपाल पुलिस और नेपाल आर्मी के जवानों ने मोर्चा संभाला। दोनों देशों के सुरक्षा बलों के संयुक्त प्रयास से सीमा क्षेत्र में शांति व्यवस्था कायम रही। किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है। मतदाताओं में उत्साह, स्थिर सरकार की उम्मीद
नेपाल के नागरिकों में इस बार स्थिर और मजबूत सरकार के गठन को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर मतदान में हिस्सा लिया। राजनीतिक अस्थिरता और आंदोलनों से थके लोगों को उम्मीद है कि यह चुनाव देश को स्थायित्व और विकास की नई दिशा देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस चुनाव के परिणाम न केवल नेपाल की आंतरिक राजनीति बल्कि भारत-नेपाल संबंधों पर भी प्रभाव डालेंगे। फिलहाल मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होने के बाद अब सभी की निगाहें मतगणना और अंतिम परिणाम पर टिकी हैं।










