सार्वजनिक स्थानों के साथ ही अब पर्यटकीय स्थलों को भी अतिक्रमण मुक्त कराने की तैयारी।

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जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह,

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- पर्यटन विभाग वाल्मीकिनगर में अतिक्रमण वाले स्थलों की पहचान कर बुल्डोजर चलाने की तैयारी में है। इसका मकसद पर्यटकीय स्थलों को अतिक्रमण मुक्त करने के साथ ही वहां जनसुविधाओं को विकसित करना है।विभागीय अधिकारियों के अनुसार वाल्मीकिनगर के आसपास कई पर्यटन स्थलों पर अतिक्रमण की शिकायत मिल रही थी। इस शिकायत के बाद ही पर्यटन व कला संस्कृति विभाग ने डीएम को अतिक्रमित जमीन को मुक्त कराने को लेकर दिशा-निर्देश भेजा है। विभाग ने कहा है कि सभी अतिक्रमित स्थलों की पहचान कर रिपोर्ट विभाग को सौंपे ताकि उसके आधार पर अतिक्रमित जमीन को मुक्त कराया जा सके। वाल्मीकि नगर में पर्यटन विकास के लिए सरकार को उपलब्ध कराई गई 14.75 एकड़ भूमि को लेकर राजस्व अधिकारी रवि प्रकाश चौधरी आज बाल्मीकि नगर पहुंचे। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि यह भूमि पर्यटन विस्तार के लिए दी गई है, लेकिन इस पर वर्तमान में कई लोगों के आवास बने हुए हैं। भूमि खाली कराने से पहले सरकार पूरी तरह मानवीय और सामाजिक न्याय आधारित प्रक्रिया अपनाएगी। जिन लोगों के घर इस भूमि पर बने हैं, उन्हें बेदखल नहीं किया जाएगा।

इसके बजाय, अनुसूचित जाति-जनजाति, महादलित, पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग, दिव्यांग, महिलाएं और वृद्धजनों को प्राथमिकता देते हुए “अभियान बसेरा
समग्र विकास योजना” के तहत पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी।भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर संचालित इस अभियान के अंतर्गत, पहले वैकल्पिक भूमि की पहचान की जाएगी और पात्र परिवारों को वहां बसाया जाएगा। सभी प्रभावित परिवारों के विधिवत पुनर्वास के बाद ही सरकार इस भूमि पर पर्यटन विकास से संबंधित कार्य शुरू करेगी।

प्रकृति के दीदार के साथ धार्मिक दर्शन भी

वाल्मीकिनगर अपनी खूबसूरती के साथ साथ धार्मिक मान्यताओं के लिए भी प्रसिद्ध है। वाल्मीकि आश्रम से लेकर महाकालेश्वर और जटाशंकर मंदिर विश्व प्रसिद्ध है। सरकार पाथवे के माध्यम से इन स्थलों को जोड़ रही है। जिससे पैदल ही नदी के किनारे विचरण करते हुए सैलानी आसानी से घूम सकते हैं। वहीं, नदी के दूसरे छोर से नेपाल की ओर से भी वाल्मीकिनगर की खूबसूरती को आसानी से निहारा जा सके।वीटीआर के रूप में अमिट पहचान रखने वाले वाल्मीकि नगर की नई पहचान स्थापित हो रही है। अब वीटीआर क्षेत्र को पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इतना ही नहीं वाल्मीकि नगर आने वाले सैलानियों को एक नई सौगात मिलने जा रहा है। बताते चले कि वाल्मीकिनगर प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक धरोहर और सांस्कृतिक महत्व से समृद्ध क्षेत्र है। यहां पहले से ही पर्यटकों के लिए इको पार्क, जंगल सफारी, गंडक नदी में राफ्टिंग, गंडक बराज, होम स्टे, वाल्मीकि भवन, बंबू व ट्री हट पर्यटकों को लुभा रहे है। लवकुश इको टूरिज्म पार्क के बनने के बाद यह इलाका एक संपूर्ण पर्यटन हब के रूप में विकसित हो जाएगा। जंगल सफारी का रोमांच, राफ्टिंग का साहसिक अनुभव, इको पार्क का शांत वातावरण और टाइगर रिजर्व की जैवविविधता मिलकर वाल्मीकिनगर को देश-विदेश के पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण होगा।

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