फायर सीजन खत्म, वीटीआर में ‘ऑपरेशन मानसून’ की तैयारी, बाघों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए बढ़ाई जा रही निगरानी।

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नेपाल सीमा पर एसएसबी और वनकर्मियों की संयुक्त गश्त होगी तेज

बेतिया/वाल्मीकिनगर: वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) में फायर सीजन की समाप्ति के साथ ही वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर ‘ऑपरेशन मानसून’ की तैयारी शुरु कर दी गई है। मानसून के दौरान संभावित चुनौतियों और शिकारियों की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए वन विभाग ने विशेष रणनीति तैयार की है। इसके तहत संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और गश्ती टीमों का सघन दौरा शामिल है। वीटीआर प्रशासन हर वर्ष फायर सीजन के बाद ऑपरेशन मानसून चलाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य बाघों सहित अन्य दुर्लभ वन्यजीवों को शिकारियों और तस्करों से सुरक्षित रखना होता है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की सीमाएं नेपाल और उत्तर प्रदेश से सटी होने के कारण यह क्षेत्र सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में वन विभाग द्वारा पैदल गश्त, हाथियों की मदद से निगरानी तथा खोजी कुत्तों की सहायता से जंगलों में लगातार अभियान चलाया जाता है। सीमा क्षेत्रों में एसएसबी और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई इंडो-नेपाल सीमा पर वन अपराधों की रोकथाम के लिए एसएसबी की 21वीं वाहिनी और वनकर्मियों द्वारा संयुक्त गश्त नियमित अंतराल पर की जाती है। डॉग स्क्वायड के साथ सीमावर्ती जंगलों में लगातार निगरानी रखी जाती है ताकि वन्यजीवों की तस्करी, अवैध शिकार और अपराधियों की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके। वनकर्मियों की टीमें आठ से दस सदस्यों के समूह में लंबी दूरी की गश्त की जाती हैं। उन्हें आधुनिक तकनीकों और आवश्यक संसाधनों से लैस किया जाता है।

बाढ़ और दुर्गम रास्ते बनते हैं बड़ी चुनौती

मानसून के दौरान वीटीआर का लगभग एक तिहाई क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आ जाता है। भारी बारिश के कारण जंगलों के कच्चे रास्ते दलदली हो जाते हैं, जिससे वाहनों की आवाजाही और गश्त प्रभावित होती है। ऐसी परिस्थितियों में हाथियों की मदद से वन क्षेत्रों में निगरानी की जाती है। नेपाल सीमा से लगे इलाकों में शिकारियों की सक्रियता की आशंका भी बनी रहती है। कई बार शिकारी वन्यजीवों को फंसाने के लिए जंगलों में जाल बिछा देते हैं। इस संबंध में वाल्मीकिनगर रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि पर्यटन सत्र समाप्त होने के पूर्व ऑपरेशन मानसून की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है। इस बार विशेष रूप से आधुनिक तकनीक के बेहतर उपयोग पर जोर दिया जा रहा है, ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा और वन संरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

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