

मनुष्य के व्यक्तित्व और व्यवहार की सूक्ष्म पहचान पर आधारित शिक्षा देता है।चाणक्यनीति का यह श्लोक
सभ्रमः स्नेहमाख्याति वपुराख्याति भोजनम् ।
आचारः कुलमाख्याति देशमाख्याति भाषणम् ॥
भ्रम (घबराहट या व्यवहार की स्थिति) से स्नेह का पता चलता है, शरीर से भोजन का पता चलता है, आचरण से कुल (परिवार/संस्कार) का पता चलता है।बोलचाल से व्यक्ति के देश या क्षेत्र का पता चलता है। संकेत है कि मनुष्य के बाहरी आचरण और व्यवहार से उसके बारे में बहुत कुछ जाना जा सकता है—व्यक्ति का प्रेम और अपनापन उसके व्यवहार से प्रकट होता है।शरीर की स्थिति से उसके खान-पान की झलक मिलती है। अच्छे या बुरे आचरण से उसके संस्कार और परिवार की पहचान होती है।व्यक्ति की भाषा और बोलने का ढंग उसके क्षेत्र या पृष्ठभूमि को प्रकट कर देता है।










