

गंडक नदी, ठंडी हवाएं और जंगल सफारी बना रही पर्यटकों का सफर यादगार, 15 जून तक जारी रहेगा पर्यटन सत्र।
जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर : भीषण गर्मी की मार झेल रहे बिहार वासियों के लिए वाल्मीकि टाइगर रिजर्व इन दिनों राहत और रोमांच का सबसे पसंदीदा ठिकाना बन गया है। जहां बिहार के कई जिलों में तापमान 41 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, वहीं वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के घने जंगलों और गंडक नदी के किनारे मौसम अपेक्षाकृत ठंडा और सुहावना बना हुआ है। यही वजह है कि यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। गर्म हवाओं और चिलचिलाती धूप से परेशान लोग अब प्रकृति की गोद में सुकून तलाशने वीटीआर का रुख कर रहे हैं। जंगल के भीतर तापमान 28 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने से पर्यटकों को गर्मी से काफी राहत मिल रही है। हरियाली से आच्छादित पहाड़ियां, सघन वन क्षेत्र और गंडक नदी की ठंडी हवाएं सैलानियों को मंत्रमुग्ध कर रही हैं। वन विभाग के अनुसार आम दिनों में प्रतिदिन 150 से 200 पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं, जबकि शनिवार और रविवार को यह संख्या दोगुनी हो जाती है। बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश, झारखंड और नेपाल से भी लोग यहां पहुंचकर जंगल सफारी और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले रहे हैं। वाल्मीकिनगर रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि टाइगर रिजर्व में बड़ी संख्या में मौजूद सदाबहार वृक्ष और प्रदूषण मुक्त वातावरण यहां के तापमान को नियंत्रित रखते हैं। उन्होंने कहा कि जंगल सफारी के दौरान पर्यटक प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ वन्यजीवों को करीब से देखने का रोमांच भी महसूस कर रहे हैं। कई बार पर्यटकों को सफारी के दौरान बाघ के दीदार भी हो जाते हैं, जो उनके सफर को और खास बना देता है। गंडक नदी के शांत जल में पहाड़ों का प्रतिबिंब और जंगल की हरियाली पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित कर रही है।

सफारी के दौरान बाघ, तेंदुआ, गौर, हिरण, भालू, जंगली सुअर, मोर तथा कई दुर्लभ पक्षियों को देखने का अवसर मिल रहा है। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक वीटीआर का पर्यटन सत्र हर वर्ष 15 जून तक संचालित किया जाता है। इस वर्ष भी 15 जून को पर्यटन सत्र का औपचारिक समापन होगा। हालांकि मानसून की स्थिति को देखते हुए इसमें बदलाव संभव है। यदि समय से पहले भारी बारिश शुरू हो जाती है, तो सुरक्षा कारणों से जंगल सफारी और गंडक सफारी को समय से पहले बंद किया जा सकता है। बरसात के मौसम में पहाड़ी नदियों से आने वाली मिट्टी, पत्थर और रेत जंगल के रास्तों को बाधित कर देते हैं, जिससे सफारी ट्रैक क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। साथ ही पहाड़ी मार्गों पर वाहन संचालन भी जोखिम भरा हो जाता है। वन्यजीवों के प्रजनन काल और पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बरसात में सफारी संचालन पर अस्थायी रोक लगा दी जाती है। भीषण गर्मी के इस दौर में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव पर्यटकों के लिए सुकून, रोमांच और हरियाली का अद्भुत संगम बना हुआ है।










