चंपारण से सियासत की नई शुरुआत, निशांत कुमार की सद्भाव यात्रा से बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी।

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जनसंवाद, विकास और सामाजिक समरसता के एजेंडे के साथ मैदान में उतरे निशांत

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर: पश्चिम चंपारण की ऐतिहासिक धरती एक बार फिर बिहार की राजनीति में नई शुरुआत की गवाह बन रही है। जदयू नेता निशांत कुमार की “सद्भाव यात्रा” ने इलाके में राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। इस यात्रा को केवल राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक संवाद, संगठन सुदृढ़ीकरण और विकास के व्यापक संकल्प से जोड़ा जा रहा है। निशांत कुमार ने यात्रा के दौरान समाज के विभिन्न वर्गों से सीधा संवाद स्थापित किया। उन्होंने लव-कुश की पावन भूमि को नमन करते हुए पार्टी के पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद लिया। इस पहल से कार्यकर्ताओं में नया जोश देखने को मिला और संगठन में ऊर्जा का संचार हुआ।


मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा स्थापित त्याग, सेवा और नैतिक राजनीति की परंपरा को आगे बढ़ाने की दिशा में निशांत कुमार ने जनसंवाद को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि जिस तरह बिहार की जनता ने उनके पिता को दो दशकों तक सेवा का अवसर दिया, उसी तरह वे भी राज्य की सेवा का अवसर चाहते हैं। उन्होंने समाज के हर वर्ग—गरीब, अमीर, दलित, पिछड़ा, अति पिछड़ा और अल्पसंख्यक—को साथ लेकर चलने और भाईचारे का संदेश देने पर जोर दिया।
लक्ष्मीपुर रमपुरवा में यात्रा के दौरान थारू आदिवासी महिलाओं ने पारंपरिक झमटा-झुमर नृत्य प्रस्तुत कर उनका स्वागत किया।

इस मौके पर निशांत कुमार ने चंपारण के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि महात्मा गांधी ने अपना पहला सत्याग्रह यहीं से शुरू किया था और उनके पिता ने भी कई महत्वपूर्ण यात्राओं की शुरुआत इसी भूमि से की थी। उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अपनी यात्रा चंपारण से शुरू की है।“निश्चय रथ” पर सवार यह यात्रा निशांत कुमार के जमीनी राजनीति में औपचारिक प्रवेश का संकेत मानी जा रही है। रथ पर लिखा संदेश ‘बहन-बेटियों के सपने साकार, धन्यवाद नीतीश कुमार’ राज्य सरकार की विकासोन्मुखी सोच को दर्शाता है। सोमवार की सुबह वाल्मीकिनगर में उनके कार्यक्रम का खास आकर्षण वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) का जंगल सफारी रहा। यहां उन्होंने हिरण, मोर, भालू और जंगली सूअरों को करीब से देखा और क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता की सराहना की। उन्होंने कहा कि वाल्मीकिनगर पर्यटन और रोजगार की दृष्टि से बेहद संभावनाओं वाला क्षेत्र है।


सफारी के बाद उन्होंने कन्वेंशन सेंटर में महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और महाकालेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना कर राज्य की सुख-शांति की कामना की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा सियासी दृष्टि से भी काफी अहम है। पश्चिम चंपारण और सीमावर्ती इलाकों में पार्टी की पकड़ मजबूत करने और आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए इसे रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
इस दौरान श्रवण कुमार, धीरेंद्र प्रताप सिंह, राकेश सिंह, धर्मशीला गुप्ता, सुरेश कुमार गुप्ता, संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी जी, एमएलसी मंजीत सिंह और अन्य नेता व कार्यकर्ता मौजूद रहे। सद्भाव यात्रा के जरिए जदयू अब एक नए दौर में प्रवेश करती नजर आ रही है, जहां युवा नेतृत्व, नई सोच और विकास का एजेंडा बिहार की राजनीति को नई दिशा देने की तैयारी में है।

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