

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर:- वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से सटा संतपुर गांव इन दिनों पर्यटन के नक्शे पर तेजी से उभरता हुआ एक नया आकर्षण बन गया है। जनजातीय बहुल इस गांव में वन विभाग के सहयोग से संचालित होम स्टे पर्यटकों को एक अलग ही अनुभव दे रहा है। यहां आने वाले सैलानी न केवल जंगलों की प्राकृतिक खूबसूरती का आनंद ले रहे हैं, बल्कि थारू जनजाति की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली को भी करीब से महसूस कर रहे हैं। संतपुर, सोहरिया पंचायत का एक प्रमुख गांव है। इस गांव में ईको विकास समिति के अध्यक्ष संतोष काजी द्वारा संचालित होम स्टे को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। वातानुकूलित कमरे, स्वच्छ और शांत वातावरण, चारों ओर खिले रंग-बिरंगे फूल और फलों के पेड़ों से घिरा परिसर पर्यटकों को सुकून और ताजगी का अनुभव कराता है। खास बात यह है कि यहां ठहरने का किराया भी वन विभाग द्वारा निर्धारित है, जो जंगल कैंप के बंबू हट और वाल्मीकि विहार विश्रामागार के बराबर है, जिससे यह सुविधा सैलानियों के लिए किफायती भी बन जाती है। वन विभाग की इस पहल का उद्देश्य पर्यटकों को सिर्फ जंगल तक सीमित न रखकर उन्हें गांवों तक लाना, ताकि वे स्थानीय जीवनशैली को समझ सकें और जनजातीय समुदाय को रोजगार के अवसर मिल सकें। यही कारण है कि संतपुर का यह होम स्टे अब एक सांस्कृतिक पर्यटन मॉडल के रूप में उभर रहा है।

यहां ठहरने वाले पर्यटकों को थारू समाज के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखने का अनूठा अवसर मिलता है। ‘चेची’, ‘पकली’ और ‘पीठा’ जैसे लजीज और पारंपरिक पकवान पर्यटकों के बीच खासे लोकप्रिय हो रहे हैं। इसके साथ ही मटर, आलू और टमाटर से बना देसी अचार भी भोजन का अहम हिस्सा होता है। इन व्यंजनों को गांव की महिलाएं पारंपरिक विधि से तैयार करती हैं और उनके पीछे की कहानी भी साझा करती हैं, जिससे पर्यटकों का अनुभव और भी समृद्ध हो जाता है। संतपुर होम स्टे की एक और बड़ी खासियत यहां का आत्मीय स्वागत है। जब पर्यटक गांव पहुंचते हैं, तो जनजातीय समुदाय के लोग गीत-संगीत और पारंपरिक नृत्य के साथ उनका गर्मजोशी से स्वागत करते हैं। रात के समय ‘झरका’ और ‘झमटा’ जैसे लोकनृत्य प्रस्तुत किए जाते हैं, जो सैलानियों के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन जाते हैं। महिलाएं सिर पर पारंपरिक सामग्री रखकर गीतों के माध्यम से अपनी संस्कृति की झलक पेश करती हैं, जिससे पर्यटक मंत्रमुग्ध हो उठते हैं। वन विभाग की यह पहल न केवल क्षेत्र में पर्यटन को नई दिशा दे रही है, बल्कि जनजातीय समाज के आर्थिक सशक्तिकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस संबंध में वाल्मीकिनगर के रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि संतपुर का यह होम स्टे उन लोगों के लिए आदर्श स्थल बनता जा रहा है, जो प्रकृति के साथ-साथ संस्कृति को भी नजदीक से जानने और महसूस करने की इच्छा रखते हैं।










