

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर:- आगामी बाढ़ को देखते हुए जल संसाधन विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। हर साल 1 जून से शुरू होने वाली बाढ़ अवधि से पहले विभाग ने गंडक नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में व्यापक तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में नदी किनारे संभावित कटाव स्थलों को सुरक्षित करने के लिए बोल्डर क्रेटिंग (जाली में पत्थर भरने) का कार्य शुरू कर दिया गया है। गंडक नदी की तेज धार से तटबंधों और एप्रोच बांध को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए विभाग द्वारा करीब 1126 मीटर लंबाई में जाली में बोल्डर भरकर सुरक्षात्मक कार्य किया जा रहा है। यह पहल खासकर उन स्थानों पर की जा रही है जहां हर साल कटाव का खतरा अधिक रहता है। विभाग का उद्देश्य है कि बाढ़ के दौरान पानी के तेज बहाव से मिट्टी का कटाव न हो और तटबंध पूरी तरह सुरक्षित रहें। कार्यपालक अभियंता मोहम्मद इकबाल अनवर ने बताया कि इस परियोजना पर करीब 2 करोड़ 40 लाख रुपये की लागत आ रही है। उन्होंने कहा कि “गंडक नदी के किनारे स्थित एप्रोच बांध और पाथवे को सुरक्षित रखना हमारी प्राथमिकता है। बोल्डर क्रेटिंग से मिट्टी को मजबूती मिलेगी और तेज बहाव के बावजूद कटाव को रोका जा सकेगा।”जल संसाधन विभाग द्वारा सिर्फ बोल्डर क्रेटिंग ही नहीं, बल्कि अन्य कई जरूरी कार्य भी तेजी से किए जा रहे हैं।

गंडक बैराज के सभी 36 फाटकों की ग्रीसिंग का कार्य भी विशेषज्ञ अभियंताओं की निगरानी में जारी है। इसके साथ ही बैराज के अन्य मेंटेनेंस कार्यों को भी अंतिम चरण में पहुंचा दिया गया है, ताकि बाढ़ के समय किसी प्रकार की तकनीकी बाधा उत्पन्न न हो। विभाग का लक्ष्य है कि एक जून से पहले सभी जरूरी मरम्मत कार्य पूर्ण कर लिए जाएं, जिससे बाढ़ के दौरान किसी भी प्रकार की आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। इसके लिए वरीय अभियंता लगातार कार्यों की निगरानी कर रहे हैं और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्थानीय लोगों के लिए यह पहल राहत भरी खबर है। हर साल बाढ़ के दौरान गंडक नदी के किनारे बसे गांवों में कटाव और जलभराव की समस्या गंभीर रूप ले लेती है। ऐसे में समय रहते की जा रही यह तैयारी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। कुल मिलाकर, जल संसाधन विभाग इस बार बाढ़ से निपटने के लिए पूरी रणनीति और सतर्कता के साथ काम कर रहा है, ताकि जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके और तटवर्ती इलाकों को सुरक्षित रखा जा सके।










