

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर:- चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगलों में स्थित प्रसिद्ध नर देवी मंदिर सहित क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों में अष्टमी और नवमी के मौके पर डॉक्टरों की विशेष तैनाती की गई है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए विभाग ने व्यापक इंतजाम किए हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से यह पहल खासतौर पर उन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर की गई है, जब भारी भीड़ के कारण श्रद्धालु बेहोश हो जाते हैं या पूजा-पाठ के दौरान शारीरिक असुविधा का सामना करते हैं। ऐसे में तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सके, इसके लिए डॉक्टरों की टीम को दो भागों में बांटा गया है। एक टीम स्थायी रूप से स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात है, जबकि दूसरी टीम अस्थायी रूप से मंदिर परिसरों में एंबुलेंस के साथ भ्रमण कर रही है। अस्थायी टीम अष्टमी और नवमी तक 24 घंटे सक्रिय रहेगी और मंदिरों में मौजूद श्रद्धालुओं पर नजर रखेगी। हर एंबुलेंस में प्राथमिक उपचार से लेकर जरूरी दवाओं तक की पूरी व्यवस्था की गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत दी जा सके। खास बात यह है कि प्रत्येक टीम में एक महिला चिकित्सक की भी तैनाती सुनिश्चित की गई है, जिससे महिला श्रद्धालुओं को भी किसी प्रकार की असुविधा न हो। स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर विकास कुमार ने बताया कि पूजा के दौरान कई बार श्रद्धालु अधिक भीड़ या थकान के कारण मूर्छित हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में मौके पर ही इलाज मिलना बेहद जरूरी होता है। इसी उद्देश्य से जिले के प्रमुख मंदिरों में डॉक्टरों की टीम तैनात की गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। इसके अलावा विभाग ने निगरानी के लिए एक विशेष जांच टीम भी गठित की है। यह टीम लगातार मंदिरों का दौरा कर डॉक्टरों की उपस्थिति और उनकी कार्यप्रणाली पर नजर रख रही है। चिकित्सा प्रभारी डॉ. केबीएन सिंह के अनुसार, किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके लिए एक फ्लाइंग टीम भी बनाई गई है, जो अचानक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा ले रही है। विशेष परिस्थितियों के लिए एंबुलेंस सेवा को भी पूरी तरह तैयार रखा गया है। यदि किसी श्रद्धालु की स्थिति गंभीर होती है, तो उसे तुरंत अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचाया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर बेहतर इलाज के लिए बगहा या बेतिया रेफर करने की भी व्यवस्था की गई है। राहत की बात यह है कि इस आपातकालीन सेवा के लिए श्रद्धालुओं को किसी प्रकार का शुल्क नहीं देना होगा। नवरात्र के इस महत्वपूर्ण अवसर पर स्वास्थ्य विभाग की यह पहल न केवल श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और निश्चिंत वातावरण में पूजा-अर्चना करने का अवसर भी प्रदान कर रही है।










