अतिक्रमण नोटिस पर सियासी गरमाहट, ग्रामीणों के समर्थन में उतरे वाल्मीकि नगर विधायक, कार्रवाई पर रोक की मांग तेज।

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जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह,

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- वाल्मीकिनगर में जल संसाधन विभाग द्वारा जारी अतिक्रमण हटाने के नोटिस के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध तेज हो गया है। बढ़ते आक्रोश और अनिश्चितता के बीच क्षेत्रीय विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा ग्रामीणों के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने वाल्मीकिनगर स्थित शिव मंदिर परिसर में स्थानीय लोगों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनीं और हरसंभव मदद का भरोसा दिया। बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीण, व्यापारी और गृहस्वामी पहुंचे, जिन्होंने अपने रोजगार और आशियाने पर मंडरा रहे खतरे को लेकर गहरी चिंता जताई। इस दौरान विधायक ने लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा, “मेरे जीते जी आपको उस स्थान से कोई हटा नहीं सकता। आपकी समस्या को गृह मंत्री के समक्ष मजबूती से रखा जाएगा।” उनके इस बयान के बाद लोगों में कुछ राहत जरूर देखने को मिली। दरअसल, जल संसाधन विभाग ने गोल चौक से लेकर तीन आरडी पुल चौक तक सड़क किनारे स्थित दुकानों और मकानों को अतिक्रमण करार देते हुए सात दिनों के भीतर खाली करने का निर्देश जारी किया है। नोटिस में साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि समय सीमा के अंदर भूमि खाली नहीं करने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश के बाद पूरे क्षेत्र में “उजाड़ अभियान” की आशंका से भय और असंतोष का माहौल बन गया है। शिव मंदिर परिसर में आयोजित बैठक के दौरान लोगों ने एकजुट होकर इस कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। उनका कहना है कि वे कई वर्षों से इस स्थान पर रहकर अपनी जीविका चला रहे हैं, ऐसे में अचानक हटाने की कार्रवाई उनके जीवन पर गंभीर असर डालेगी। ग्रामीणों और व्यापारियों ने विधायक से यह भी मांग की कि सिंचाई विभाग की भूमि पर बसे इन घरों और दुकानों को नियमित करते हुए उन्हें वैध रूप से आवंटित किया जाए। उनका तर्क है कि वर्षों से बसे लोगों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के हटाना न केवल अमानवीय है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करेगा। बताया जा रहा है कि यह मामला भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने सीमा से 15 किलोमीटर के दायरे में आने वाली सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए गृह मंत्रालय को पत्र भेजा था। इसके बाद गृह मंत्रालय के निर्देश पर बिहार सरकार ने आवश्यक कार्रवाई शुरू की, जिसके तहत जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि प्रशासन की इस पहल को जहां सुरक्षा और नियमों के पालन से जोड़ा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों के सामने आजीविका और आवास का संकट खड़ा हो गया है। फिलहाल, विधायक के हस्तक्षेप से लोगों को उम्मीद की किरण दिखी है, लेकिन जब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक वाल्मीकिनगर में स्थिति तनावपूर्ण बनी रहने की संभावना है।

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