लाल पत्तियों से सजा वीटीआर, पतझड़ में कुसुम पेड़ों ने बिखेरी अनोखी रंगत।

0
19

Spread the love

जिला ब्यूरो बेतिया विवेक कुमार सिंह की रिपोर्ट..

बेतिया/वाल्मीकिनगर: तापमान में बढ़ोतरी के साथ ही वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में पतझड़ का आगमन हो गया है, और इसके साथ ही जंगलों की खूबसूरती अपने चरम पर पहुंच गई है। इन दिनों रिजर्व के पेड़ नई पत्तियों की चादर ओढ़ने लगे हैं, जिससे पूरा जंगल रंग-बिरंगे प्राकृतिक सौंदर्य से सराबोर हो उठा है। खासकर ‘कुसुम’ नामक पेड़ की प्रजाति इस समय पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। वीटीआर के जंगलों में पाए जाने वाले कुसुम के पेड़ अपनी अनोखी विशेषता के कारण पूरे दक्षिण एशिया में प्रसिद्ध हैं। आमतौर पर पेड़ों की पत्तियां हरे रंग की होती हैं, लेकिन कुसुम के पेड़ों की नई पत्तियां लाल रंग की होती हैं। यह लाल रंग महज 20 से 22 दिनों तक ही रहता है, जिसके बाद पत्तियां धीरे-धीरे हरे रंग में बदल जाती हैं। साल में केवल एक बार दिखाई देने वाला यह प्राकृतिक बदलाव लोगों को रोमांचित कर देता है। इस अनोखे नजारे को देखने और कैमरे में कैद करने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक इन दिनों वीटीआर पहुंच रहे हैं। सड़क किनारे खड़े कुसुम के पेड़ों पर लाल, गुलाबी, भूरे और हल्के हरे रंग की पत्तियां एक साथ नजर आती हैं, जो किसी उत्सव जैसा दृश्य प्रस्तुत करती हैं। हवा के झोंकों के साथ झूमती शाखाएं और उन पर चमकती पत्तियां पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं।


प्रकृति प्रेमी मनोज कुमार बताते हैं कि कुसुम ‘सोपबेरी’ फैमिली का पेड़ है, जो भारत के हिमालयी क्षेत्र की तलहटी में पाया जाता है। वीटीआर में इन पेड़ों की संख्या काफी अधिक है, लेकिन जानकारी के अभाव में कई लोग इस खास मौसम में इनके रंग परिवर्तन को देखने से चूक जाते हैं। उन्होंने बताया कि यह पेड़ न केवल सुंदरता का प्रतीक है, बल्कि वन्यजीवों के लिए भी उपयोगी है। कुसुम के पत्ते चीतल और बंदरों के लिए पौष्टिक भोजन का स्रोत हैं। इन दिनों वीटीआर के जंगलों में नई कोपलों के साथ हरियाली भी तेजी से बढ़ रही है। पतझड़ के इस मौसम में जहां एक ओर पुराने पत्ते झड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नई पत्तियां जीवन के नए चक्र का संकेत दे रही हैं। यही कारण है कि जंगलों का दृश्य हर दिन बदलता हुआ और अधिक आकर्षक नजर आता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो पत्तियों के इस रंग परिवर्तन के पीछे क्लोरोफिल और एंथ्रोसाइनिन का महत्वपूर्ण योगदान होता है। सामान्यतः पत्तियों का हरा रंग क्लोरोफिल के कारण होता है, लेकिन कुसुम के पेड़ों में इस समय एंथ्रोसाइनिन ज्यादा सक्रिय हो जाता है, जिससे पत्तियां लाल रंग की दिखाई देती हैं। सुबह के समय उगते सूरज की किरणों में इन लाल पत्तियों की चमक और भी अधिक निखर जाती है। ऐसे में इन रास्तों से गुजरना किसी प्राकृतिक उत्सव में शामिल होने जैसा अनुभव देता है। कुल मिलाकर, पतझड़ के इस मौसम में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की बदलती रंगत न केवल पर्यटकों को आकर्षित कर रही है, बल्कि यह प्रकृति के अद्भुत और जीवंत रूप को भी प्रदर्शित कर रही है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here