दहकता वीटीआर, बढ़ती गर्मी के साथ जंगलों में आग का तांडव, वन्य जीवन पर संकट।

0
17

Spread the love

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- तापमान में लगातार हो रही वृद्धि के साथ ही वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) के जंगलों में आग लगने की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी जा रही है। हालात ऐसे हो गए हैं कि टाइगर रिजर्व के कई कक्षों के जंगल आग की चपेट में आकर जल चुके हैं। इस भीषण आगजनी ने न केवल हरियाली को निगल लिया है, बल्कि दुर्लभ जड़ी-बूटियों और छोटे पौधों को भी पूरी तरह नष्ट कर दिया है। ताजा मामला जटाशंकर चेक नाका के समीप का है, जहां शरारती तत्वों द्वारा लगाई गई आग ने लगभग एक एकड़ जंगल क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और इलाका धुएं से भर गया। तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैलती चली गई, जिससे स्थिति और भी भयावह हो गई। हालांकि वन विभाग के कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया। इस आगजनी में अनेक बेशकीमती जड़ी-बूटियां और पौधे जलकर राख हो गए। सबसे ज्यादा नुकसान उन जीवों को हुआ जो जमीन के भीतर रहते हैं। खरगोश, सांप, मेंढक, झींगुर सहित कई कीट-पतंगे और उनके अंडे आग की भेंट चढ़ गए। दावानल ने न सिर्फ वन संपदा को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि वन्य जीवों के अस्तित्व पर भी गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। आस-पास के क्षेत्रों में भी लगातार आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं। हाल ही में कई जगहों पर आगजनी के कारण झाड़ियां पूरी तरह जलकर राख हो गईं। स्थिति यह है कि वन विभाग को अक्सर आग की जानकारी तब मिलती है, जब वह विकराल रूप ले चुकी होती है। दूर-दराज के जंगलों में आग की घटनाओं पर समय रहते नियंत्रण पाना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। जानकारी के अनुसार, कुछ शरारती तत्व नई घास उगाने की चाह में जानबूझकर जंगल में आग लगा देते हैं। लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि यह आग पूरे जंगल को तबाह कर देती है। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान होता है, बल्कि जंगल पर निर्भर वन्य जीवों का जीवन भी संकट में पड़ जाता है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए वाल्मीकि नगर रेंजर सत्यम कुमार ने अपने कर्मचारियों को हाई अलर्ट पर रखा है। लगातार निगरानी बढ़ाई जा रही है और आग पर जल्द काबू पाने के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। बावजूद इसके, बढ़ती गर्मी और शुष्क मौसम के कारण आने वाले दिनों में आग लगने की घटनाएं और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वीटीआर की जैव विविधता को अपूरणीय क्षति हो सकती है। ऐसे में जरूरी है कि आगजनी की घटनाओं पर सख्ती से रोक लगाई जाए और लोगों को इसके प्रति जागरूक किया जाए, ताकि इस अमूल्य वन संपदा को बचाया जा सके।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here