

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर:- गर्मी के मौसम में वीटीआर को आग से बचाने के लिए वन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। अब जंगल में जानबूझकर आग लगाने वाले लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर दो से तीन साल तक की सजा और दस हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जंगल में आग लगाना गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है और दोषी व्यक्ति को वन विभाग के अधिकारी बिना वारंट के भी गिरफ्तार कर सकते हैं। वन क्षेत्र में आग की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने लोगों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि गर्मी के दिनों में जंगलों में सूखे पत्तों की मात्रा अधिक हो जाती है, जिससे आग लगने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। हल्की सी चिंगारी भी बड़े जंगल को अपनी चपेट में ले सकती है। ऐसे में छोटी सी लापरवाही भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।
उन्होंने बताया कि जंगल में लगने वाली आग से न केवल पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचता है, बल्कि इससे पर्यावरण पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है। आग लगने से कार्बन डाईऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी खतरनाक गैसें वातावरण में फैलती हैं, जो जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्याओं को बढ़ावा देती हैं। इसके अलावा जंगलों में रहने वाले वन्य जीवों के जीवन पर भी संकट मंडराने लगता है। आग से बचने के लिए कई बार जंगली जानवर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर लेते हैं, जिससे आम लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाती है। वन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जंगल में धूम्रपान करना भी दंडनीय अपराध माना जाएगा। यदि कोई व्यक्ति जंगल क्षेत्र में बीड़ी, सिगरेट या माचिस का जलता टुकड़ा फेंकते हुए पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभाग का कहना है कि जंगलों में आग लगने की अधिकांश घटनाएं बीड़ी और सिगरेट के जलते टुकड़ों के कारण ही होती हैं। इस कारण वन संपदा को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। वन विभाग द्वारा 15 मार्च से 15 जून तक की अवधि को फायर सीजन घोषित किया गया है। इस दौरान पूरे वन क्षेत्र में विशेष सतर्कता बरती जाएगी और नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। गर्मी के मौसम में पेड़ों से बड़ी मात्रा में सूखी पत्तियां गिरती हैं और तापमान अधिक होने के कारण ये आसानी से आग पकड़ लेती हैं। ऐसे में जरा सी चिंगारी भी बड़ी आग का रूप ले सकती है। विभाग ने स्थानीय लोगों और जंगल में आने वाले पर्यटकों से अपील की है कि वे जंगल में किसी भी प्रकार की लापरवाही न करें और आग से बचाव के नियमों का पालन करें। साथ ही यदि कहीं भी आग लगने की घटना दिखाई दे तो तुरंत वन विभाग को सूचना दें, ताकि समय रहते उस पर काबू पाया जा सके और जंगल तथा वन्य जीवों को सुरक्षित रखा जा सके।










