

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- पर्यटन और सीमावर्ती क्षेत्र के विकास को नई गति देने की दिशा में वाल्मीकिनगर एयरपोर्ट निर्माण की प्रक्रिया तेज हो गई है। गुरुवार की दोपहर एयरपोर्ट निर्माण के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण को लेकर जिला प्रशासन के अधिकारियों ने एयरपोर्ट परिसर में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और रैयतदारों के साथ बैठक कर विस्तार से चर्चा की। बैठक में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया, मुआवजा राशि और आवश्यक दस्तावेजों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई। बैठक में जिला प्रशासन की ओर से अपर समाहर्ता राजीव रंजन सिन्हा, डीसीएलआर अंजलिका कृति, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार, प्रखंड विकास पदाधिकारी बिट्टू कुमार राम, अपर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी राकेश सिंह तथा भाग्य नारायण राय सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने रैयतों और जनप्रतिनिधियों को एयरपोर्ट निर्माण से जुड़ी योजनाओं और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से अवगत कराया। अपर समाहर्ता राजीव रंजन सिन्हा ने बताया कि बिहार सरकार द्वारा वाल्मीकिनगर एयरपोर्ट निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। लगभग 38.64 लाख रुपये की लागत से बनने वाले इस एयरपोर्ट के लिए कुल 18 एकड़ भूमि की आवश्यकता है। इसमें से लगभग 6 एकड़ सरकारी जमीन पहले से उपलब्ध है, जबकि शेष 12 एकड़ जमीन स्थानीय रैयतों से ली जानी है। उन्होंने बताया कि टर्मिनल भवन के निर्माण के लिए 12 एकड़ भूमि की जरूरत होगी, जबकि रनवे के विस्तार के लिए अतिरिक्त जमीन का उपयोग किया जाएगा। अधिकारियों ने बैठक में स्पष्ट किया कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया वर्ष 2014 में लागू सरकार की सतत लीज नीति के तहत की जाएगी। इस प्रक्रिया के तहत रैयतों से जमीन की रजिस्ट्री कराई जाती है, जिसके बाद जमीन सरकार के नाम हो जाती है। रजिस्ट्री पूरी होने के बाद रैयतों को चेक के माध्यम से तत्काल भुगतान कर दिया जाता है। प्रशासन ने यह भी बताया कि जमीन देने वाले रैयतों को सर्किल रेट के चार गुना तक मुआवजा दिया जाएगा, ताकि उन्हें उचित मूल्य मिल सके। अधिकारियों ने रैयतों से अपील की कि वे जमीन से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज और स्वामित्व के साक्ष्य प्रस्तुत करें। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी की जाएगी और उसी समय मुआवजा राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। जमीन के बदले जमीन की मांग उठी बैठक के दौरान कई रैयतदारों ने अपनी जमीन के बदले दूसरी जगह जमीन देने की मांग उठाई। उनका कहना था कि यदि उनकी कृषि योग्य जमीन एयरपोर्ट निर्माण के लिए ली जाती है तो उनकी आजीविका प्रभावित होगी, इसलिए उन्हें कहीं अन्यत्र जमीन उपलब्ध कराई जाए। हालांकि विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वर्तमान सरकारी नीति में जमीन के बदले जमीन देने का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए केवल निर्धारित मुआवजा राशि ही दी जा सकती है। एमवीआर के तहत मिलेगा मुआवजा बैठक में रैयतों ने लक्ष्मीपुर रमपुरवा पंचायत और वाल्मीकिनगर पंचायत में जमीन के एमवीआर (न्यूनतम मूल्य) में अंतर का मुद्दा भी उठाया। रैयतों का कहना था कि दोनों पंचायतों में जमीन के मूल्य में काफी अंतर होने के कारण मुआवजा राशि में भी फर्क पड़ सकता है। इस पर अधिकारियों ने बताया कि भुगतान एमवीआर के आधार पर किया जाएगा और यदि रैयतों की सहमति से जमीन की रजिस्ट्री होती है तो प्रति डिसमिल जमीन के मूल्य का चार गुना मुआवजा दिया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों ने रैयतों की सभी बातों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि सरकार की नीति के अनुसार पारदर्शिता के साथ आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। साथ ही उन्होंने सभी से विकास कार्य में सहयोग करने की अपील की। गौरतलब है कि वाल्मीकिनगर नेपाल सीमा से सटा एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। यहां एयरपोर्ट का निर्माण होने से पर्यटन, व्यापार और आवागमन को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि एयरपोर्ट बनने से क्षेत्र के विकास के नए द्वार खुलेंगे और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।









