घनघोर जंगल में गूंजा राम नाम, वीटीआर के कोट माई मंदिर में 66 घंटे का अखंड संकीर्तन शुरू।

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551 कन्याओं की भव्य कलश यात्रा से हुआ शुभारंभ, विश्व शांति और समाज कल्याण की कामना के साथ जुटे श्रद्धालु।

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के भेड़िहारी जंगल के सघन वन क्षेत्र में स्थित कोट माई मंदिर परिसर इन दिनों भक्ति और आस्था के अद्भुत माहौल से सराबोर है। यहां 66 घंटे तक चलने वाले अखंड राम नाम संकीर्तन का शुभारंभ शनिवार को भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ, जिसमें 551 कन्याओं सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
पीले वस्त्र धारण किए कन्याओं ने नारायणी नदी के पावन तट पर वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच जल भरा और नंगे पांव माता के दरबार की ओर प्रस्थान किया। “जय श्री राम” और “हर हर महादेव” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। इस भव्य कलश यात्रा में 500 से अधिक वरिष्ठ नागरिकों के साथ-साथ सैकड़ों दोपहिया और चारपहिया वाहन भी शामिल रहे, जिससे आयोजन की भव्यता देखते ही बन रही थी।
हर वर्ष आयोजित होने वाला यह सार्वजनिक अष्टयाम धार्मिक आयोजन विश्व शांति और समाज कल्याण की कामना के उद्देश्य से किया जाता है। स्थानीय ग्रामीणों और आयोजन समिति के सामूहिक सहयोग से इस परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है। जंगल के बीच स्थित कोट माई मंदिर का इतिहास भी बेहद प्राचीन और रहस्यमयी माना जाता है। मंदिर के पुजारी रमाशंकर दास के अनुसार, यहां रात्रि के समय जंगली जानवरों की आवाजाही सामान्य बात है और कई बार माता की सवारी बाघ के दर्शन भी होते हैं। बावजूद इसके, माता की कृपा से अब तक किसी प्रकार की अनहोनी नहीं हुई है। अखंड अष्टयाम समिति के अध्यक्ष जितेंद्र यादव ने बताया कि इस 66 घंटे के संकीर्तन आयोजन में लगभग 6 से 7 लाख रुपये का खर्च आता है, जिसकी व्यवस्था आसपास के आठ गांवों के ग्रामीण मिलकर करते हैं। इस आयोजन में आदिवासी महिलाओं की विशेष भूमिका होती है, जो अपनी मधुर आवाज में रामधुन प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर देती हैं। साथ ही स्थानीय कन्याओं द्वारा यज्ञ मंडप में भक्ति नृत्य की प्रस्तुति भी दी जाती है। संकीर्तन के दौरान 66 घंटे तक लगातार भंडारा का आयोजन किया जाता है। व्यवस्थापक रामविलास यादव के अनुसार, कोई भी श्रद्धालु बिना प्रसाद ग्रहण किए वापस न जाए, इसके लिए विशेष व्यवस्था और जिम्मेदारी तय की गई है। बीहड़ जंगल में गूंजती राम नाम की ध्वनि न केवल श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है, बल्कि मार्ग से गुजरने वाले लोग भी इस आध्यात्मिक वातावरण की ओर खिंचे चले आ रहे हैं।

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