मंजरी से लदे आम के बाग, बागवानों के चेहरे खिले, मौसम अनुकूल रहा तो होगी रिकॉर्ड पैदावार।

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जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह,

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- वसंत के आगमन के साथ ही फलों के राजा आम ने बागवानों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है। इन दिनों क्षेत्र के आम के बाग मंजर से लदे नजर आ रहे हैं। पेड़ों पर आई घनी मंजरियां इस साल अच्छी फसल की उम्मीद जगा रही हैं। यदि आने वाले दिनों में मौसम का मिजाज अनुकूल रहा तो आम की बंपर पैदावार होने की पूरी संभावना है। किसानों का कहना है कि इस बार समय पर ठंड का असर रहा और अब तापमान भी संतुलित है, जिससे मंजर अच्छी तरह निकली है। बागवान पेड़ों पर लदे मंजर को देखकर उत्साहित हैं। उनका मानना है कि यदि आंधी, ओलावृष्टि या अत्यधिक पुरवा हवा ने नुकसान नहीं पहुंचाया तो उत्पादन बेहतर होगा।
कृषि वैज्ञानिक विनय कुमार सिंह ने बताया कि वर्तमान मौसम आम की फसल के लिए शुभ संकेत दे रहा है। उन्होंने कहा कि मंजर से लेकर फल बनने तक का समय बेहद संवेदनशील होता है। इस दौरान कीट और रोग का प्रकोप बढ़ने की आशंका रहती है। यदि समय रहते रोकथाम के उपाय कर लिए जाएं तो न केवल उत्पादन बेहतर होगा, बल्कि फलों की गुणवत्ता भी बनी रहेगी। आम की फसल में भुनगा, मिज कीट और खर्रा रोग का खतरा अधिक रहता है। भुनगा कीट नई कोपलों, बौर और छोटे फलों का रस चूस लेता है, जिससे प्रभावित भाग सूखकर गिर जाता है। वहीं पुरवा हवा चलने पर माहू कीट का प्रकोप बढ़ जाता है, जो मंजर को नुकसान पहुंचाता है। इसके अलावा फंगस भी उत्पादन पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। कृषि वैज्ञानिक ने बागवानों को सलाह दी है कि माहू कीट से बचाव के लिए इंडोसल्फान, रोगार या नूवान की दो मिलीलीटर दवा प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। 20 दिन के अंतराल पर दो बार छिड़काव लाभकारी रहेगा। यदि पहली बार इंडोसल्फान का उपयोग किया गया हो तो दूसरी बार रोगार या नूवान का प्रयोग करना बेहतर होगा। फंगस से बचाव के लिए भी उचित दवा का समय पर छिड़काव जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि जब पेड़ों में मटर के दाने के बराबर फल आ जाएं, उस समय बागों में नमी बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। पर्याप्त सिंचाई और संतुलित पोषण से फल झड़ने की समस्या कम होती है और आकार व स्वाद बेहतर बनता है। कुल मिलाकर इस समय आम की फसल उम्मीदों से भरी नजर आ रही है। अब सबकी निगाहें मौसम पर टिकी हैं। यदि प्रकृति ने साथ दिया और किसान समय पर कीट-रोग प्रबंधन करते रहे, तो इस वर्ष आम की मिठास बाजार से लेकर किसानों की आय तक में घुलती नजर आएगी।

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