पर्यटन नगरी वाल्मीकिनगर में बदहाल सड़कें, गोल चौक से जंगल कैंप जाने वाले मार्ग बने खतरे की घंटी।

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जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- पर्यटन नगरी वाल्मीकिनगर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व के कारण देश–विदेश से आने वाले पर्यटकों को लगातार आकर्षित करता रहा है। गोल चौक के बीचों बीच स्थापित महर्षि वाल्मीकि की भव्य प्रतिमा आज भी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। लेकिन इसी गोल चौक से जंगल कैंप को जोड़ने वाले तीन प्रमुख मार्गों की जर्जर हालत अब न केवल स्थानीय लोगों बल्कि पर्यटकों के लिए भी चिंता का विषय बन गई है। इन सड़कों की बदहाली ने जल संसाधन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गोल चौक से जंगल कैंप तक पहुंचने के लिए तीन रास्ते हैं। पहला मार्ग गोल चौक से कालीघाट होते हुए जंगल कैंप तक जाता है, दूसरा मार्ग जल संसाधन विभाग के कार्यालय से होकर जंगल कैंप को जोड़ता है, जबकि तीसरा मार्ग अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से बेलवा घाट होते हुए जंगल कैंप से मिलता है। इन तीनों मार्गों की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि यहां आने वाले पर्यटक भी स्थानीय लोगों से पूछने को मजबूर हैं कि आखिर इन सड़कों की मरम्मत कब होगी।
विशेष रूप से गोल चौक से कालीघाट होते हुए जंगल कैंप जाने वाला मार्ग पहले कालीकरण कराया गया था, लेकिन अब उसकी हालत बेहद भयावह हो चुकी है। सड़क की ऊपरी परत तो किसी तरह खड़ी है, लेकिन उसके नीचे से पत्थर और मिट्टी निकल चुके हैं। ऐसे में कभी भी सड़क धंसने का खतरा बना हुआ है। रात के अंधेरे में इस मार्ग से गुजरना जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई, तो यहां किसी बड़ी दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता है। सड़कों की इस बदहाल स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। समाजसेवी अमित कुमार सिंह, बीडीसी प्रतिनिधि प्रेम कुमार, चुन्नू ठाकुर, मोहम्मद इकबाल, भावी मुखिया प्रत्याशी कौलेश्वर शर्मा और पूर्व मुखिया अनिल सिंह सहित कई ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग की निष्क्रियता पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वाल्मीकिनगर मुख्यमंत्री का पसंदीदा पर्यटन स्थल माना जाता है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल की सड़कों की यह हालत बिहार के सुशासन की छवि पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है। कौलेश्वर शर्मा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही इन सड़कों की मरम्मत नहीं कराई गई, तो स्थानीय लोग जल संसाधन विभाग के मंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग करेंगे। वहीं, ग्रामीणों का यह भी कहना है कि विभाग सड़कों की जर्जर स्थिति को देखने के बावजूद मौन साधे बैठा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। इस संबंध में जब जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता मोहम्मद जिलानी से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि जल्द ही कार्यपालक अभियंता के साथ सड़कों का निरीक्षण कराया जाएगा। निरीक्षण के बाद सड़कों की मापी कर कागजी प्रक्रिया पूरी की जाएगी और जर्जर मार्गों के निर्माण व मरम्मत के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। अब देखना यह है कि विभाग के आश्वासन कितनी जल्दी जमीन पर उतरते हैं, क्योंकि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो गोल चौक से जंगल कैंप तक के ये मार्ग किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।

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