



जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह,
बेतिया/वाल्मीकिनगर। मूसलाधार बारिश के बाद एक बार फिर गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है। मौसम विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार 124 एमएम बारिश दर्ज की गई है। गंडक बराज नियंत्रण कक्ष से जारी रिपोर्ट के अनुसार गंडक नदी का जलस्तर 2 लाख क्यूसेक को पार कर गया है। मूसलाधार बारिश एवं गंडक नदी के जल स्तर में वृद्धि के कारण गंडक नदी के तटीय क्षेत्रों में बाढ़ खतरा एक बार फिर मंडराने लगा है। बाढ़ से सबसे अधिक दहशत कान्ही टोला, बीन टोली, झंडू टोला, एवं चकदहवा के लोगों में है, जो पूरी रात रतजगा करने पर मजबूर हो गए हैं। चकदहवा निवासी एवं पूर्व बीडीसी गुलाब अंसारी ने बताया कि चार गांव के लगभग 2000 आबादी इस समय भय के माहौल में जीवन व्यतीत कर रहा है। नदी की कटाव और हजारों एकड़ भूमि में लगाए गए फसलों की बर्बादी किसानों को बर्बाद करके रख दिया है।
बाढ़ प्रभावित गांवों का मुख्य मार्ग से टूटा संपर्क
वाल्मीकिनगर थाना क्षेत्र के लक्ष्मीपुर रमपुरवा पंचायत अंतर्गत आने वाला चार गांव चकदहवा, बीन टोली, कान्ही टोला एवं झंडू टोला का संपर्क बगहा वाल्मीकिनगर मुख्य मार्ग से टूट गया है। इसका मुख्य कारण इन गांवों को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली जर्जर सड़क है। जिससे होकर पैदल भी जाना मुश्किल हो गया है। बाढ़ प्रभावित गांवों के मुख्य तीन समस्याओं- बिजली, सड़क और पानी का आज तक निदान नहीं होने से ये लोग सरकारी तंत्र से खुश नही हैं।
संक्रामक रोगों के फैलने का मंडराया खतरा
गंडक नदी के किनारे बसे चार गांवों में इस समय लोगों को संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा सताने लगा है। जगह-जगह जल जमाव के कारण मच्छरों का प्रकोप और विषैले कीड़े मकोड़े के काटने के डर से भय के माहौल में जी रहे हैं। झंडू टोला निवासी नंदू बीन,हिकायत राम,शिवजी कुमार, चंद्रिका राम,सुकट बीन ने बताया कि अगर हमारे परिवार के लोग बीमार पड़ते हैं तो अस्पताल ले जाने के लिए रास्ता नहीं है। यहां नजदीक में कोई भी डॉक्टर नहीं है। हमलोगों का जिंदगी बद से बद्तर हो गयी है।










