आशा संघ ने सरकार को दी आंदोलन की चेतावनी।

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मानदेय बढ़ाने, सेवा स्थायी करने और सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने समेत नौ सूत्री मांगों को लेकर पीएचसी में सौंपा स्मारपत्र

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- बिहार राज्य आशा संघ (एटक से संबद्ध) ने आशा कार्यकर्ताओं और आशा फैसिलिटेटरों की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर राज्यव्यापी अभियान के तहत गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग के नाम स्मारपत्र हरनाटांड पीएससी को सौंपा। संघ ने सरकार से मांगों पर त्वरित एवं संवेदनशीलता के साथ विचार करते हुए ठोस निर्णय लेने की अपील की है। साथ ही चेतावनी दी है कि मांगों की अनदेखी होने पर जुलाई और अगस्त में चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। संघ द्वारा जारी स्मारपत्र में आशा कार्यकर्ताओं की सेवा शर्तों में सुधार, मानदेय वृद्धि और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी कुल नौ प्रमुख मांगें उठाई गई हैं। संघ ने आशा कार्यकर्ताओं की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष करने की मांग की है। इसके अलावा आशाओं का भुगतान नियमित करने, उनकी सेवा को स्थायी करने तथा न्यूनतम 26 हजार रुपये मासिक मानदेय सुनिश्चित करने की भी मांग रखी गई है। स्मारपत्र में कहा गया है कि कई स्थानों पर एक ही आंगनबाड़ी केंद्र पर दो-दो आशाओं की बहाली कर दी गई है, जिससे कार्य विभाजन और भुगतान संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। संघ ने इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। वहीं आशाओं के उम्र सत्यापन के लिए आधार कार्ड के बजाय उनके द्वारा जमा किए गए प्रमाण-पत्र को ही मान्य आधार बनाने की मांग भी की गई है। संघ का कहना है कि कई आशा कार्यकर्ताओं के आधार कार्ड में उम्र संबंधी त्रुटियां दर्ज हैं। आशा संघ ने केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि को दोगुना करने की मांग करते हुए कहा कि बढ़ती महंगाई के बीच वर्तमान प्रोत्साहन राशि पर्याप्त नहीं है। इसके साथ ही जिन आशाओं को मोबाइल खरीदने के लिए निर्धारित राशि अब तक नहीं मिली है, उनके भुगतान को शीघ्र सुनिश्चित करने की मांग की गई है। आशा फैसिलिटेटरों के लिए भी संघ ने विशेष मांग रखी है। संघ का कहना है कि क्षेत्र में समयबद्ध और प्रभावी कार्य निष्पादन के लिए आशा फैसिलिटेटरों को स्कूटी उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि वे आसानी से अपने कार्यक्षेत्र में पहुंच सकें। संघ के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार और स्वास्थ्य विभाग इन मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करते हैं तो 1 जुलाई से 13 जुलाई तक जिला पदाधिकारियों के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद भी समाधान नहीं होने पर 18 अगस्त को पटना में बिहार विधानसभा के समक्ष राज्यस्तरीय प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। आशा संघ के इस कदम से आने वाले दिनों में स्वास्थ्य विभाग और आशा कार्यकर्ताओं के बीच मांगों को लेकर वार्ता तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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