

29 जून को थम जाएगा जंगल सफारी का रोमांच, मानसून के लिए तीन माह बंद होंगे पर्यटन द्वार।
बेतिया/वाल्मीकिनगर: प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीवों के दीदार के शौकीनों के लिए यह आखिरी अवसर है। देशभर में अपनी जैव विविधता, घने जंगलों और बाघों की मौजूदगी के लिए प्रसिद्ध वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) का पर्यटन सत्र 29 जून को समाप्त हो जाएगा। इसके बाद मानसून और वन्यजीवों के प्रजनन काल को ध्यान में रखते हुए तीन माह के लिए जंगल सफारी समेत सभी पर्यटन गतिविधियों पर रोक लगा दी जाएगी। पर्यटन सत्र समाप्त होने में अब महज चार दिन शेष हैं। ऐसे में वीटीआर में पर्यटकों की आमद बढ़ गई है। सुबह और शाम दोनों शिफ्टों की जंगल सफारी में सीटों की मांग बढ़ रही है। बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों से भी पर्यटक वाल्मीकिनगर पहुंच रहे हैं। वीटीआर का आकर्षण केवल बाघों तक सीमित नहीं है। गंडक बराज का जलाशय, जिसे पर्यटक “मिनी गोवा” के नाम से जानते हैं, यहां आने वाले सैलानियों को विशेष रूप से आकर्षित करता है। गंडक नदी का मनमोहक दृश्य, पहाड़ों की हरियाली और जंगल का शांत वातावरण पर्यटकों को एक अलग ही अनुभव प्रदान करता है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार जून का महीना जंगल सफारी के लिए सबसे अनुकूल समय माना जाता है। गर्मी के कारण जंगलों में जल स्रोत सीमित हो जाते हैं, जिससे बाघ, तेंदुआ, हिरण, गौर और अन्य वन्यजीव जलाशयों के आसपास अधिक दिखाई देते हैं। यही वजह है कि इस समय वन्यजीवों के दर्शन की संभावना काफी बढ़ जाती है। करीब 900 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले बिहार के एकमात्र टाइगर रिजर्व में वनस्पतियों की लगभग 90 प्रजातियां मौजूद हैं। इसके अलावा यहां 60 से अधिक स्तनधारी वन्यजीव, 300 से अधिक पक्षी प्रजातियां और लगभग 30 प्रकार के सरीसृप पाए जाते हैं, जो इसे जैव विविधता का अनूठा केंद्र बनाते हैं। वाल्मीकिनगर रेंजर सत्यम कुमार के अनुसार मानसून के दौरान जंगल के कच्चे रास्ते और सफारी ट्रैक बारिश से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। साथ ही यह अवधि वन्यजीवों के प्रजनन और शावकों के संरक्षण का महत्वपूर्ण समय होती है। इसलिए उनकी सुरक्षा और प्राकृतिक गतिविधियों को निर्बाध बनाए रखने के लिए पर्यटन गतिविधियों को अस्थायी रूप से बंद किया जाता है।
पर्यटन सत्र के अंतिम दिनों में बढ़ी पर्यटकों की संख्या से गाइड, सफारी चालक, होटल संचालक, दुकानदार और ईको विकास समितियों से जुड़े ग्रामीणों को भी आर्थिक लाभ मिल रहा है। ऐसे में रोमांच और प्रकृति का यह अद्भुत संगम देखने के इच्छुक पर्यटकों के लिए वीटीआर में अब सिर्फ चार दिनों का ही समय शेष बचा है।










