

जंगल सफारी से रोमांचित हुए मंत्री लखेन्द्र कुमार रौशन, वाल्मीकि आश्रम के विकास पर दिया जोर।
जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर:-बिहार सरकार के अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग के मंत्री सह पश्चिमी चंपारण के प्रभारी मंत्री लखेन्द्र कुमार रौशन शुक्रवार को अपने एक दिवसीय वाल्मीकिनगर दौरे के दौरान यहां की प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक विरासत से अभिभूत नजर आए। सुबह उन्होंने वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी कर वन्यजीवों और प्राकृतिक संपदाओं का अवलोकन किया तथा क्षेत्र में पर्यटन विकास की अपार संभावनाओं की सराहना की।
करीब चार घंटे तक चले वन भ्रमण के दौरान मंत्री ने भारत-नेपाल सीमा पर स्थित ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व के वाल्मीकि आश्रम का भी दौरा किया। यहां उन्होंने माता सीता के पाताल लोक गमन स्थल, लव-कुश जन्मस्थली, यज्ञशाला सहित अन्य पौराणिक धरोहरों का अवलोकन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वाल्मीकिनगर धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है तथा इसके विकास के लिए भारत और नेपाल दोनों देशों को मिलकर पहल करनी चाहिए।

मंत्री ने कहा कि प्रकृति ने इस क्षेत्र को अनुपम सौंदर्य प्रदान किया है। नारायणी नदी की कल-कल धारा, तमसा और सोनभद्र नदियों का संगम तथा घने जंगलों के बीच स्थित वाल्मीकि आश्रम जैसे दृश्य देश में विरले ही देखने को मिलते हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटन के क्षेत्र में वाल्मीकिनगर को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। वन भ्रमण के दौरान प्रभारी मंत्री वाल्मीकि आश्रम स्थित सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 21वीं वाहिनी के कैंप भी पहुंचे। इस अवसर पर सहायक कमांडेंट अवधेश कुमार, अन्य एसएसबी अधिकारी तथा बगहा विधायक राम सिंह भी उपस्थित रहे। मंत्री ने सीमा सुरक्षा में तैनात जवानों की सराहना करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा और सीमाओं की शांति बनाए रखने में एसएसबी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

भ्रमण के बाद पत्रकारों से बातचीत में मंत्री ने कहा कि वाल्मीकिनगर की सुंदरता ने उन्हें अत्यंत प्रभावित किया है। उन्होंने बताया कि वे मुख्यमंत्री से आग्रह करेंगे कि भविष्य में पूरे बिहार विधानमंडल की बैठक वाल्मीकिनगर में आयोजित करने पर विचार किया जाए। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे क्षेत्र को नई पहचान मिलेगी और पर्यटन को भी व्यापक बढ़ावा मिलेगा। मंत्री ने कहा कि वे स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें इस पावन भूमि पर आने का अवसर मिला और जल्द ही अपने परिवार के साथ पुनः वाल्मीकिनगर आने की योजना बनाएंगे।










