

पर्यटकों को मिलेगा जंगल और गांव की संस्कृति का अनोखा अनुभव
जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह
बेतिया/वाल्मीकिनगर : बिहार के इकलौते टाइगर रिजर्व वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में पर्यटन विकास को नई उड़ान देने की तैयारी शुरू हो गई है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की महत्वाकांक्षी योजना के तहत वाल्मीकिनगर में लगभग 18 करोड़ रुपये की लागत से 30 इको-फ्रेंडली कॉटेज का निर्माण कराया जा रहा है। इस परियोजना से न केवल पर्यटकों को प्रकृति के करीब रहने का अवसर मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई मजबूती मिलेगी। गंडक नदी के शांत तट और घने जंगलों से घिरा वाल्मीकिनगर आने वाले दिनों में इको-टूरिज्म का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है। विभाग द्वारा तैयार किए जा रहे कॉटेज पूरी तरह ग्रामीण वास्तुकला की शैली पर आधारित होंगे। इन कॉटेज में आधुनिक सुविधाओं के साथ गांव की पारंपरिक झोपड़ियों जैसा वातावरण देखने को मिलेगा, जिससे पर्यटकों को प्राकृतिक जीवनशैली का वास्तविक अनुभव मिल सकेगा।
अभी तक बड़ी संख्या में पर्यटक वाल्मीकिनगर घूमने तो आते थे, लेकिन ठहरने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण अधिकांश लोग शाम तक वापस लौट जाते थे। नई परियोजना पूरी होने के बाद पर्यटक यहां दो से तीन दिन तक रुककर जंगल सफारी, वन्यजीव दर्शन और नेपाल सीमा से सटी खूबसूरत वादियों का आनंद उठा सकेंगे। परियोजना के तहत केवल कॉटेज ही नहीं, बल्कि सुंदर पार्क, फूड स्टॉल, पार्किंग और अन्य पर्यटन सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा। इससे पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलेगा और वाल्मीकिनगर की पहचान एक साधारण पिकनिक स्पॉट से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर के इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित होगी। यहां हर वर्ष हजारों पर्यटक जंगल सफारी, बाघ, हिरण, भालू और अन्य वन्यजीवों के दीदार के लिए पहुंचते हैं। वर्तमान में पर्यटकों के लिए होटल वाल्मीकि बिहार, जंगल कैंप परिसर में बने बंबू हट, फोर फ्लैट तथा विभिन्न वन विभागीय रेस्ट हाउस उपलब्ध हैं। हालांकि नई परियोजना के बाद ठहरने की व्यवस्था और अधिक आकर्षक तथा व्यवस्थित हो जाएगी। वाल्मीकिनगर रेंजर सत्यम कुमार की माने तो इससे होटल, गाइड, परिवहन, फूड स्टॉल और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। गौरतलब है कि कन्वेंशन सेंटर से सटे गोल चौक के समीप रेशम विभाग की भूमि पर बनने वाले इस इको-पर्यटन केंद्र का शिलान्यास 5 अप्रैल 2026 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान किया था। अब निर्माण कार्य शुरू होने के साथ ही स्थानीय लोगों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों में उत्साह बढ़ गया है।










