

बाघों की लगातार साइटिंग और प्राकृतिक खूबसूरती ने वाल्मीकि टाइगर रिजर्व को दी अंतरराष्ट्रीय पहचान
ब्यूरो विवेक कुमार सिंह की रिपोर्ट
बेतिया/वाल्मीकिनगर:- वाल्मीकि टाइगर रिजर्व इन दिनों पर्यटन सत्र के अंतिम चरण में सैलानियों से गुलजार हो उठा है। बाघों की लगातार हो रही साइटिंग, जंगल सफारी का रोमांच और प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। पर्यटन सत्र समाप्त होने में अब कुछ ही दिन शेष बचे हैं, ऐसे में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। वाल्मीकिनगर स्थित वीटीआर का प्रवेश द्वार हर वर्ष अक्टूबर माह में पर्यटकों के लिए खोला जाता है। इसके बाद लगभग आठ महीने तक यह इलाका पर्यटकों से आबाद रहता है। मानसून के दौरान सुरक्षा कारणों से पार्क को बंद कर दिया जाता है। बंद होने की तिथि नजदीक आते ही सुबह और शाम दोनों शिफ्टों में पर्यटकों की भीड़ उमड़ रही है। वीटीआर न केवल बाघों के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां की प्राकृतिक खूबसूरती भी पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है। गंडक बराज का मनोरम दृश्य पर्यटकों को गोवा जैसे पर्यटन स्थल का एहसास कराता है। वहीं गंडक नदी के जलाशय में राफ्टिंग भी इस बार पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। इस पर्यटन सत्र में बाघों के अधिक दीदार ने वीटीआर को नई पहचान दिलाई है। पहले से ही बाघों की बढ़ती आबादी के लिए चर्चित वीटीआर अब टाइगर साइटिंग के लिए भी देश और विदेश में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। विदेशी पर्यटकों ने भी इस बार बड़ी संख्या में यहां पहुंचकर जंगल सफारी और वन्यजीवों का आनंद लिया।
जंगल में पर्यटकों को बाघ, तेंदुआ, भालू, हिरन, चीतल सहित कई वन्यजीव देखने को मिल रहे हैं। इसके अलावा विभिन्न प्रजातियों के पक्षी और राष्ट्रीय पक्षी मोर भी पर्यटकों का मन मोह रहे हैं। गर्मी के मौसम में राहत पाने के लिए लोग सुबह और शाम के समय जंगल सफारी का अधिक आनंद ले रहे हैं।
वाल्मीकिनगर रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि पर्यटन सत्र के अंतिम चरण में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि इस बार वीटीआर को पिछले वर्षों की तुलना में अधिक राजस्व प्राप्त होने की संभावना है। लगातार बढ़ती लोकप्रियता के कारण वाल्मीकि टाइगर रिजर्व अब देश ही नहीं बल्कि विदेशी धरती पर भी एक प्रमुख टूरिज्म आईकॉन के रूप में उभर रहा है।










