वाल्मीकि आश्रम में 18 जून को होगी लव-कुश प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा।

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रामायण कालीन पावन धाम में धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारी तेज श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल

जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर :- भारत-नेपाल सीमा पर स्थित प्रसिद्ध वाल्मीकि आश्रम में स्थापित लव-कुश की भव्य प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा आगामी 18 जून को की जाएगी। इस धार्मिक आयोजन को लेकर पर्यटन नगरी वाल्मीकिनगर सहित आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं के बीच भारी उत्साह देखा जा रहा है। आश्रम परिसर में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। नेपाल के चितवन जिले में स्थित यह ऐतिहासिक आश्रम वाल्मीकिनगर से लगभग साढ़े चार किलोमीटर की दूरी पर घने जंगलों और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच अवस्थित है। चितवन नेशनल पार्क क्षेत्र से सटे इस स्थल पर बाघ, तेंदुआ, भालू समेत कई वन्य जीव पाए जाते हैं। धार्मिक महत्व के साथ-साथ प्राकृतिक सुंदरता के कारण यह क्षेत्र पर्यटकों और श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
रामायण कालीन मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम द्वारा माता सीता को वनवास दिए जाने के बाद लक्ष्मण उन्हें इसी आश्रम में छोड़कर अयोध्या लौट गए थे। यहीं माता सीता ने लव और कुश को जन्म दिया तथा महर्षि वाल्मीकि ने दोनों को वेद, शास्त्र और अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा प्रदान की। यह भी माना जाता है कि महर्षि वाल्मीकि ने इसी तपोभूमि पर रामायण की रचना की थी। आश्रम परिसर में आज भी माता सीता की कुटिया, उनकी रसोई, प्राचीन कुआं तथा वह ऐतिहासिक वृक्ष मौजूद है, जिसके नीचे बैठकर लव-कुश शिक्षा ग्रहण करते थे। यहां बने झूलों को लेकर भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था है। मान्यता है कि बाल्यकाल में लव-कुश इन्हीं झूलों पर खेला करते थे। वाल्मीकि आश्रम के उत्तराधिकारी पुजारी रामशरण गिरी बाबा ने बताया कि प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर भगवान श्रीराम, माता सीता और लव-कुश की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी से सजाया जाएगा तथा पूरे क्षेत्र में रामधुन, भजन-कीर्तन और संकीर्तन का आयोजन होगा। श्रद्धालुओं के स्वागत और ठहरने की भी विशेष व्यवस्था की जा रही है। प्रतिमा निर्माणकर्ता राम अवतार कुशवाहा ने बताया कि वाल्मीकि आश्रम में लव-कुश की प्रतिमा का अभाव लंबे समय से महसूस किया जा रहा था। इसे ध्यान में रखते हुए लगभग तीन लाख नेपाली रुपये की लागत से भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है। उन्होंने बताया कि नेपाली पंचांग के अनुसार 4 गते अर्थात 18 जून को विधि-विधान के साथ प्राण प्रतिष्ठा संपन्न होगी। आश्रम से जुड़ी अश्वमेघ यज्ञ की कथा भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम के अश्वमेघ यज्ञ का घोड़ा जब इस क्षेत्र में पहुंचा था, तब लव-कुश ने उसे पकड़कर बांध लिया था। वहीं माता सीता के पाताल प्रवेश स्थल को भी श्रद्धालु अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ देखते हैं। नारायणी, तमसा और सोनभद्र नदियों के तट पर स्थित यह आश्रम धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक महत्व का अद्भुत संगम माना जाता है। लव-कुश प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

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