मानदेय बढ़ोतरी की मांग को लेकर फूटा आक्रोश, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के वनकर्मी आंदोलन की राह पर।

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जिला ब्यूरो, विवेक कुमार सिंह

बेतिया/वाल्मीकिनगर:- वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में कार्यरत दैनिक वेतन भोगी वनकर्मियों के बीच वन विभाग के प्रति असंतोष लगातार गहराता जा रहा है। मानदेय बढ़ोतरी नहीं होने और कुछ कर्मियों को सेवा से मुक्त किए जाने के विरोध में अब वनकर्मियों ने आंदोलन का रास्ता अपना लिया है। मंगलवार को वन प्रमंडल एक, दो और तीन के कर्मियों की बैठक हर्नाटांड़ रेंज के बहुरवा कुट्टी में हुई, जिसमें शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया, हालांकि धरना प्रदर्शन कब शुरू होगा, इसकी तिथि अभी तय नहीं की गई है। वनकर्मियों का कहना है कि लंबे समय से उन्हें मानदेय का भुगतान नहीं मिल रहा है। साथ ही, पहले दिए गए वेतन बढ़ोतरी के आश्वासन भी अब तक अधूरे हैं। जानकारी के अनुसार, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रधान सचिव आनंद किशोर ने दिसंबर माह में यह भरोसा दिलाया था कि जनवरी से दैनिक वेतन भोगियों के मानदेय में वृद्धि की जाएगी। लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी न तो बढ़ोतरी लागू हुई और न ही नियमित भुगतान शुरू हो पाया है। वन कर्मचारी संघ के जिला मंत्री जयप्रकाश तालुकदार ने बताया कि पहले से ही हड़ताल की योजना बनाई जा रही थी, लेकिन विभागीय आश्वासन के बाद उसे टाल दिया गया था। अब जब न तो वादे पूरे हुए और कुछ कर्मियों को सेवा से हटा दिया गया, तो कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। उन्होंने सेवा मुक्त कर्मियों को पुनः ड्यूटी पर बहाल करने और बकाया मानदेय का तत्काल भुगतान करने की मांग उठाई है। संघ के अध्यक्ष अजय राम ने कहा कि वनकर्मी 24 घंटे ड्यूटी करते हैं, लेकिन उन्हें मात्र 8 से 10 हजार रुपये तक का मानदेय मिलता है। इतना ही नहीं, ड्यूटी के दौरान किसी दुर्घटना या वन्यजीवों के हमले में मौत होने पर भी विभाग की ओर से कोई मुआवजा नहीं दिया जाता, जिससे उनके परिवारों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वनकर्मियों की प्रमुख मांगों में वेतन वृद्धि, 60 वर्ष तक नियमितीकरण, सेवा मुक्त कर्मियों की बहाली और सभी रेंजों में 8 घंटे की ड्यूटी तय करना शामिल है। उन्होंने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। इधर, वन प्रमंडल-2 के डीएफओ विकास कुमार अहलावत ने बताया कि मानदेय बढ़ोतरी के लिए अभी आवंटन जारी नहीं हुआ है और वरीय अधिकारियों से कोई स्पष्ट निर्देश भी प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि आदेश मिलने के पश्चात मानदेय में बढ़ोतरी संभव है। वही धरने की चेतावनी के बाद विभाग में हलचल तेज हो गई है। अब देखना होगा कि वन प्रशासन इस बढ़ते असंतोष को कैसे संभालता है और वनकर्मियों की मांगों पर क्या कदम उठाता है।

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